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Nuvama: अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती का भारतीय बाजार पर क्या असर पड़ेगा? नुवामा ने अपनी रिपोर्ट में बताया

Thu, 12 Sep 2024 01:33 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Nuvama Report: रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में अमेरिकी श्रम बाजार के कई संकेतक चेतावनी भरे संकेत दे रहे हैं। यह परिदृश्य 2007 से काफी अलग है, जब घरेलू मांग मजबूत थी और जिसने बाजार में शुरुआती उछाल में योगदान दिया था।
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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नुवामा की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय शेयर बाजार नई दिशा में जाने की कगार पर हैं। नुवामा ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से आने वाले समय में ब्याज दरों में संभावित कटौती को देखते हुए यह बात कही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक सिद्धांत अक्सर इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इस तरह की कटौती भारत में इक्विटी वैल्यूएशन को बढ़ावा देती है, लेकिन ऐतिहासिक आंकड़े इसकी तस्दीक नहीं करते हैँ। 

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रिपोर्ट के अनुसार, 2001 में फेड द्वारा दरों में कटौती शुरू करने के बाद, भारत के निफ्टी इंडेक्स में 35 प्रतिशत की महत्वपूर्ण गिरावट देखी गई। कुछ साल बाद, 2007 में, बाजार ने शुरुआती उछाल का अनुभव किया, लेकिन वैश्विक वित्तीय संकट के बीच 2008 में 60 प्रतिशत तक गिर गया। हाल ही में, 2019 में, फेड द्वारा ढील दिए जाने के बावजूद, बाजार काफी हद तक सपाट रहे। 

रिपोर्ट में कहा गया है, "सिद्धांत मूल्यांकन में वृद्धि का सुझाव देता है; इतिहास इसके विपरीत संकेत देता है। 2001 में, निफ्टी 35 प्रतिशत गिरा; 2007 में, यह मामूली रूप से कमजोर पड़ा, लेकिन 2008 में 60 प्रतिशत गिर गया।" 
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ये विभिन्न परिणाम अन्य कारकों के महत्व को उजागर करते हैं, जैसे कि अमेरिकी श्रम बाजार की स्थिति, घरेलू मांग और बाजार मूल्यांकन इत्यादि। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में अमेरिकी श्रम बाजार के कई संकेतक चेतावनी भरे संकेत दे रहे हैं। यह परिदृश्य 2007 से काफी अलग है, जब घरेलू मांग मजबूत थी और जिसने बाजार में शुरुआती उछाल में योगदान दिया था। अब, हालांकि, घरेलू मांग कमजोर है, जिससे आर्थिक सुधार की मजबूती के बारे में चिंताएं बढ़ रही हैं। इसके अलावा, 2019 की तुलना में, बाजार का मूल्यांकन काफी अधिक है। इक्विटी की कीमतें कमाई की संभावना के साक्षेप अधिक दिखाई दे रही हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ये स्थितियां निवेशकों को सतर्कता बरतने की सलाह देती हैं, खासकर उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मूल्य वृद्धि देखी गई। रिपोर्ट के अनुसार उद्योग, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां ( PSU),ऑटोमोबाइल और मेटल सेक्टर के शेयरों में सुस्ती दिख रही है।

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