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BoB: अमेरिकी फेड की तीसरी दर कटौती, 2026 में आरबीआई के 5% रेपो रेट पर स्थिर रहने की उम्मीद

Thu, 11 Dec 2025 03:43 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने लगातार तीसरी बार ब्याज दर घटाई, जबकि 2025 में कुल 75 आधार अंकों की कटौती हो चुकी है। कमजोर श्रम बाजार और शटडाउन के कारण आर्थिक डेटा की कमी इस फैसले की बड़ी वजह है। बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री दिपानविता मजूमदार के अनुसार, भारत का रेपो रेट 2026 में 5% पर स्थिर रह सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने वर्ष के अंत में अपनी तीसरी लगातार ब्याज दर कटौती की घोषणा की है। फेड ने फेडरल फंड्स रेट को घटाकर 3.50% से 3.75% की सीमा में ला दिया है। वर्ष 2025 में कुल मिलाकर 75 आधार अंकों की कटौती की जा चुकी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिकी श्रम बाजार के संकेतक लगातार कमजोर बने हुए हैं और सरकार के शटडाउन के कारण नई आर्थिक सूचनाओं का प्रवाह बाधित हो गया है।

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आरबीआई 2026 में ब्याज दर रखेगा स्थिर

बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री दिपानविता मजूमदार ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक रुझानों और घरेलू स्थिति को देखते हुए भारत का रेपो रेट कैलेंडर वर्ष 2026 में 5% के स्तर पर स्थिर रहने की संभावना है।

भारत और अमेरिका के बीच नीतिगत दरों में अंतर है नियंत्रित

फेड की यह नीति वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों पर महत्वपूर्ण असर डालेगी, और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अपने मौद्रिक फैसलों में इससे जुड़े बदलावों को ध्यान में रखना होगा।  मजूमदार ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच नीतिगत दरों में अंतर काफी हद तक नियंत्रित रहा है। इसका कारण अमेरिका की तुलना में आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में अधिक तेजी से की गई कटौती है। ब्याज उपज में अंतर ने भी नीतिगत दरों में अंतर के समान ही रुझान दिखाया है। इससे शुरुआती महीनों में विदेशी निवेशकों (एफपीआई) के प्रवाह को समर्थन मिला। 

रुपये में अस्थिरता ने निवेश के प्रवाह पर डाला असर

उन्होंने कहा कि हालांकि, रुपये की अस्थिरता ने हाल के समय में निवेश प्रवाह को प्रभावित किया है। आगे चलकर, हम उम्मीद करते हैं कि भारत और अमेरिका के बीच नीतिगत दर का अंतर मौजूदा स्तर पर बना रहेगा।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि निकट भविष्य में भारत और अमेरिका के बीच उच्च उपज अंतर से विदेशी निवेश (एफपीआई) प्रवाह को समर्थन मिलेगा और इससे मुद्रा को कुछ हद तक मजबूती मिलने की उम्मीद है। घरेलू खाद्य कीमतों पर नियंत्रण होने के कारण मुद्रास्फीति का अंतर भी भारत के पक्ष में झुका रहेगा।

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछले सप्ताह रेपो दर को पहले के 5.50% से घटाकर 5.25% कर दिया। नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) 3% पर अपरिवर्तित है, और स्थायी सुविधा दर को 5.25% से घटाकर 5% कर दिया गया है। 
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