बीमा पॉलिसी का प्रीमियम हो सकता है माफ
खाद्य फसलों के लिए बीमा पॉलिसी लेने वालों किसानों के लिए पूरी तरह से प्रीमियम माफ करने का भी प्रस्ताव है। सरकार तेलंगाना और ओडिसा सरकारों द्वारा अपनाई गई योजनाओं का मूल्यांकन कर रही है, जिसके तहत एक निर्धारित रकम सीधे किसानों के खातों में डाली जाती है।
मालूम हो कि 2019-20 के लिए अंतरिम बजट एक फरवरी को पेश होना है। कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने हाल ही में संकेत दिया था कि सरकार 2019-20 के बजट से पहले किसानों के लिए राहत पैकेज की घोषणा करेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के पास किसी भी नई योजाना के क्रियान्वयन के लिए कम समय है। इसलिए उपाय ऐसा होना चाहिए जिसकी चुनाव के दौरान तेजी से राजनीतिक लाभ उठाया जा सके। कहा जा रहा है कि हाल में तीन राज्यों- मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद भाजपा किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर गंभीर है।
इस स्कीम को किया जा सकता है लागू
तेलंगाना सरकार की ‘रितु बंधु’ की तरह किसान केंद्रित योजना जो कि किसानों को प्रत्यक्ष नगदी सहयोग के तौर पर 4,000 रुपये प्रति एकड़ प्रति सीजन मुहैया कराती है, को लागू किया जा सकता है। तेलंगाना की योजना सभी किसानों को कवर करती है फिर उनके पास कितनी भी भूमि हो।
भाजपा सरकार उड़ीसा में यह स्कीम ला सकती है जो कि छोटे एवं सीमांत किसानों (जिनके पास 5 एकड़ या 2 हेक्टेयर से कम जमीन है) को सुविधा मुहैया कराती है। 10वीं कृषि गणना 2015-16 के अनुसार, छोटे एवं सीमांत किसान जिनके पास दो हेक्टेअर से कम भूमि है, का भारत में समस्त किसानों में 86.2 प्रतिशत योगदान है और इनके पास 47.3 प्रतिशत फसल क्षेत्र है।
2014-15 तक, सकल बुवाई क्षेत्र 198.36 मिलियन हेक्टेयर अथवा लगभग496 मिलियन एकड़ था। इस तरह, छोटे एवं सीमांत किसानों के पास 234 मिलियन एकड़ की जमीन थी और 4000 रुपये प्रति एकड़ के नगदी सहयोग पर विचार करें तो कुल खर्च 93,600 करोड़ रह सकता है।