तेल की बढ़ती कीमतों से खाद सब्सिडी को छोड़कर चालू वित्त वर्ष में सरकार के बजट में कोई बदलाव नहीं आएगा। खाद सब्सिडी के लगभग 10,000 करोड़ रुपये तक बढ़ने का अनुमान है।
रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से 2021-22 में सरकार का खाद (उर्वरक) सब्सिडी बिल करीब 10,000 करोड़ रुपये बढ़ सकता है। हालांकि, कर राजस्व बढ़ने से राजकोषीय घाटे को अनुमानित 6.9% के करीब रखने में मदद मिलेगी। इस वृद्धि के बावजूद राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में संशोधित अनुमानों के अनुरूप 6.9% के करीब रहेगा।
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एक अधिकारी ने कहा, अमेरिका और ओपेक के सदस्य देशों की ओर से उत्पादन बढ़ाने के कारण 2-3 महीनों में कच्चे तेल के दाम कम होने की उम्मीद है। तेल की बढ़ती कीमतों से खाद सब्सिडी को छोड़कर चालू वित्त वर्ष में सरकार के बजट में कोई बदलाव नहीं आएगा। खाद सब्सिडी के लगभग 10,000 करोड़ रुपये तक बढ़ने का अनुमान है।
संशोधित अनुमानों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में खाद सब्सिडी 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक रह सकती है, जबकि अगले वित्त वर्ष के बजट अनुमानों के अनुसार यह 1.05 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहेगी।
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उन्होंने कहा, किसानों को बुवाई के मौसम की शुरुआत से पहले खाद भंडारण की जरूरत होती है। ऐसे में पोटाश के आयात के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों के कम होने तक इंतजार नहीं कर सकते हैं।