गरीबी रेखा के नीचे गुजर बसर करने वाले परिवारों को केन्द्र सरकार की तरफ से नि:शुल्क रसोई गैस -एलपीजी- गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने की प्रधानमंत्री उज्जवला योजना उनके स्वास्थ्य एवं जीवन स्तर को ऊपर उठाने में ऐतिहासिक साबित होगी। यह कहना है यूनिवर्सिटी आफ केलिफोर्निया बार्कले के ग्लोबल इनवायरामेंट हेल्थ विभाग में प्रोफेसर डा. किर्क आर. स्मिथ का।
स्मिथ का कहना है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना भारत के एकदम गरीब परिवारों के जीवन में बदलाव लाने का ऐतिहासिक अवसर होगा। जिन परिवारों को लक्ष्य कर यह योजना शुरू की गई है, वह परिवार आज भी गोबर के उपले और लकड़ी जला कर खाना बनाते हैं। ऐसे परिवारों की संख्या करीब 70 करोड़ है, जो आज भी पारंपरिक चूल्हे में उपले और लकड़ी का उपयोग कर खाना बनाने को मजबूर हैं। हालांकि पिछले 60 साल के दौरान इस चूल्हे को उन्नत बनाने के लिए काफी प्रयास हुए हैं लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
उनका कहना है कि भारत में खाना पकाने के दौरान धुंआ लगने की वजह से साल में 9 लाख से भी अधिक महिलाएं काल कलवित हो जाती हैं। अध्ययन बताता है कि यदि इन घरों में यदि एलपीजी जैसे सुरक्षित ईंधन से खाना बनाया जाता तो इन मौतों को टाला जा सकता है। हालांकि जनसंख्या के ऐसे वर्ग में स्वास्थ्य से संबंधित अन्य खतरे भी विद्यमान हैं, जिनमें पोषण से भरपूर भोजन नहीं मिलना, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलना आदि शामिल है। जहां तक लकड़ी-उपले पर भोजन बनाने से होने वाली बीमारियों का संबंध है, इसे पांच तरह की बीमारी होती है।
अध्ययन से पता चला है कि वायु प्रदूषण, धूम्रपान या घर में खाना बनाने के दौरान लगने वाले धुएं से बच्चों में न्यूमोनिया और बड़ों में फेफड़े की बीमारी, हृदय रोग, हृदयाघात और फेफरे के कैंसर जैसी बीमारी होती है। इन बीमारियों से जान जाने का काफी खतरा होता है। किर्क स्मिथ का कहना है कि भारत सरकार ने जो गिव इट अप योजना की शुरूआत की है, उसे मध्यम वर्ग का भारी समर्थन मिला है। इस मद में जो पैसे बचेंगे, उससे गरीबी रेखा के नीचे जीवन बिताने वाले परिवारों को स्वच्छ ईंधन -एलपीजी- का कनेक्शन उपलब्ध कराया जा सकेगा। उल्लेखनीय है कि गिव इट अप योजना के तहत 1 करोड़ से भी ज्यादा लोगों ने सब्सिडी छोड़ दी है।