दालों की कीमतों में एक बार फिर से उछाल आने लगा है। फिलहाल चुनाव नतीजों के आने से पहले ही खुदरा बाजार में इनकी कीमत फिर से 2009 के स्तर पर पहुंच गई हैं। जानकारों का कहना है कि अगर दाम ऐसे ही बढ़ते रहे तो फिर आम आदमी की थाली से दाल गायब हो जाएगी।
देश भर में सबसे ज्यादा मांग अरहर की दाल की होती है। इसको लोग तुअर दाल भी कहते हैं। फिलहाल अरहर दाल के दाम सबसे ज्यादा चढ़ गए हैं। खुदरा बाजार में अरहर की दाल 100 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही है।
पिछले वित्त वर्ष में अरहर की दाल का उत्पादन काफी कम हुआ था। इसमें 30-35 फीसदी की कमी बताई जा रही है। वहीं उड़द दाल के उत्पादन में पिछले साल की तुलना में 15-20 फीसदी की गिरावट है। तुअर एवं उड़द में तेजी के रुख से चना दाल में भी मजबूती शुरू हो गई है। थोक मंडी में तुअर दाल की कीमत 5700-5800 रुपये प्रति क्विंटल है। वहीं चना दाल की थोक कीमत 4500 रुपये प्रति क्विंटल है। पिछले दो माह के दौरान दालों के थोक भाव में 800 रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी आई है।
महाराष्ट्र के लातूर में इस वक्त तुअर दाल का थोक भाव 58 रुपये प्रति किलो चल रहे हैं। वहीं दाल मिल पर थोक भाव 85 रुपये प्रति किलो हैं। पिछली बार 2009 में इस दाल की कीमत 100 रुपये प्रति किलो के पार चली गई थी। वहीं 2015 के शुरुआती कुछ महीनों तक इसके दाम 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए थे। दाल के थोक दाम में बढ़ोतरी से किसानों को राहत मिल रही है क्योंकि ढाई साल के बाद पहली बार तुअर के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के स्तर को पार किया है। तुअर का एमएसपी 5650 रुपये प्रति क्विंटल है।
भारत के अलावा कुछ अफ्रीकी देशों और म्यांमार में तुअर दाल का उत्पादन होता है। अफ्रीकी देशों में भी इसके उत्पादन में कमी आई है। वहीं वर्ष 2015 के बाद तुअर के भाव में नरमी का रुख जारी रहने की वजह से पिछले साल किसानों ने भी तुअर की बुवाई कम की। यही वजह है पिछले एक माह में तुअर दाल के दाम में 10 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हो गई है।