केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक जुलाई से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने की उम्मीद जताते हुए बुधवार को कहा कि यह एक सबसे बड़े एकीकृत बाजार का निर्माण करेगा और इसके कारण सामान सस्ते होंगे तथा कर चोरी कठिन हो जाएगी। 23वें राष्ट्रमंडल ऑडीटर जनरल सम्मेलन में जेटली ने कहा कि भारत में कर अनुपालन का स्तर काफी कम है और सरकार ने नकदी का उपयोग घटाने के लिए नोटबंदी की, क्योंकि नकदी के अधिक उपयोग से कर चोरी तथा आतंक के फाइनेंसिंग को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने कहा कि सरकार के सुधारात्मक कदमों से भारत की विकास दर 7-8 फीसदी तक रखने और सबसे तेज विकास दर वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रहने में मदद मिल सकती है, लेकिन अस्थिर तेल कीमतें, निजी निवेश में तेजी लाने और सरकारी बैंकों के स्वास्थ्य को लेकर चुनौती की स्थिति बनी हुई है।
जीएसटी पर उन्होंने कहा कि इससे वस्तु एवं सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी, वहीं मजबूत आईटी संरचना के कारण कर चोरी कठिन हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू करने से कर वसूली बढ़ेगी, कर के ऊपर कर नहीं लगेगा, जिससे वस्तु और सेवाएं थोड़ी सस्ती हो जाएंगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसी सप्ताह चार सहायक जीएसटी विधेयकों को मंजूरी दे दी, जो संसद में चालू सत्र में ही पेश कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संसद से पारित हो जाने के बाद हम इसे इस साल के मध्य तक लागू करने की उम्मीद करते हैं।