अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने कहा कि जो भी देश ईरान के साथ कोई भी कारोबार करेगा, उसे अमेरिका के साथ होने वाले अपने सभी व्यापार पर 25 प्रतिशत टैरिफ देना होगा। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में चीन, तुर्की, भारत, संयुक्त अरब अमीरात, पाकिस्तान और आर्मेनिया शामिल हैं। ऐसे में ट्रंप के इस कदम का सीधा असर इन देशों पर पड़ सकता है। ट्रंप की इस घोषणा का असर भारत पर पड़ सकता है, जो हाल के वर्षों में ईरान के पांच सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक रहा है। अमेरिका ने पहले ही भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है, जो दुनिया में सबसे अधिक टैरिफ में से एक है।
वाणिज्यिक खुफिया व सांख्यिकी महानिदेशालय (डीजीसीआईएस) के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत से ईरान को होने वाले निर्यात में अनाज सबसे आगे रहा, जिसकी कीमत लगभग 649 मिलियन अमेरिकी डॉलर रही।
तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा कि भारत और ईरान बीच सहस्राब्दियों पुराने ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध रहे हैं। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, समकालीन भारत-ईरान संबंध इन्हीं मजबूत ऐतिहासिक जड़ों पर आधारित हैं और उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्क, वाणिज्यिक व कनेक्टिविटी सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मजबूत जन-संबंधों के माध्यम से लगातार मजबूत हो रहे हैं।
भारत-ईरान संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ चाबहार बंदरगाह का संयुक्त विकास है। ईरान के ऊर्जा-समृद्ध दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित चाबहार बंदरगाह को भारत और ईरान मिलकर विकसित कर रहे हैं, ताकि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके।
मई 2015 में भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह विकास योजना में भारत की भागीदारी को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद मई 2016 में भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय परिवहन और ट्रांजिट कॉरिडोर-चाबहार समझौते की स्थापना की गई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत ईरान के सहयोग से चाबहार बंदरगाह के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के पहले चरण के विकास में भागीदारी कर रहा है। दिसंबर 2018 में एक भारतीय कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल चाबहार फ्री जोन (IPGCFZ) के माध्यम से चाबहार बंदरगाह का संचालन अपने हाथ में लिया।