घरेलू शेयर बाजार में पिछले साल अक्तूबर से लगातार भारी गिरावट का बहुत बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशक हैं। इस साल जनवरी से लेकर अब तक इन निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.30 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। किसी कैलेंडर साल में यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर बिकवाली हुई है।
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरीज लि.(एनएसडीएल) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआआई ने 78,027 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। फरवरी में 34,574 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। मार्च में यह घटकर केवल 3,973 करोड़ रुपये रह गया। अप्रैल में इन निवेशकों ने जबरदस्त वापसी की और 4,223 करोड़ रुपये का निवेश किया। मई में 19,860 करोड़ के शेयर खरीदे तो जून में 14,590 करोड़ रुपये का निवेश किया।
निवेश का यह रुझान जुलाई में फिर टूट गया। इस दौरान एफआईआई ने 17,741 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले। अगस्त में अब तक 34,993 करोड़ रुपये की निकासी की गई है। यह जनवरी के बाद इस साल में दूसरी सबसे बड़ी निकासी है। विश्लेषकों का कहना है कि एफआईआई की यह निकासी मूलरूप से देशों के बीच तनाव और शेयर बाजारों में अस्थिरता के कारण हो रही है।
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क्या कहते है विश्लेषकों का?
विश्लेषकों के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार का मूल्यांकन काफी ऊंचा है। इसलिए विदेशी निवेशक यहां से पैसा निकालकर दूसरे सस्ते उभरते हुए बाजारों में लगा रहे हैं। इसके अलावा वे कुछ ऐसे साधनों में भी निवेश कर रहे हैं जहां इस समय जोखिम कम है।
इस साल एफडी से भी कम रिटर्न...
एक जनवरी को सेंसेक्स 78,507 पर बंद हुआ था। शुक्रवार को यह 79,809 पर बंद हुआ। यानी करीब दो फीसदी का फायदा मिला है। जबकि इस दौरान बैंकों या कंपनियों के एफडी में 8 फीसदी तक का फायदा हुआ है। जनवरी में एफडी कराने वाले निवेशकों को और भी ज्यादा फायदा मिला है।
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विदेशी मुद्रा भंडार 4.38 अरब डॉलर घटा
22 अगस्त को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 4.386 अरब डॉलर घटकर 690.72 अरब डॉलर रह गया। यह गिरावट इसलिए आई क्योंकि रिजर्व बैंक ने रुपये की गिरावट थामने के लिए डॉलर की बिकवाली की थी। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा संपत्तियां 3.65 अरब डॉलर घटकर 582.25 अरब डॉलर रह गईं।