तमिलनाडु वैश्विक जहाज निर्माण केंद्र बनने जा रहा है। केंद्र सरकार की दो सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड राज्य में अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड कमर्शियल शिपयार्ड स्थापित करने के लिए कुल 30,000 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी।
भाजपा नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इन समझौतों से 55,000 रोजगार के अवसर पैदा होंगे और तमिलनाडु जहाज निर्माण और समुद्री नवाचार का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाएगा।
जानकारी के मुताबिक, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड 15,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है, जिसके पहले चरण में 10,000 रोजगार (4,000 प्रत्यक्ष और 6,000 अप्रत्यक्ष) सृजित होंगे। वहीं, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड भी 15,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा, जिससे 45,000 रोजगार (5,000 प्रत्यक्ष और 40,000 अप्रत्यक्ष) उपलब्ध होंगे। मालवीय के पोस्ट में कहा गया कि यह केवल निवेश नहीं है। यह भविष्य के लिए विकास, स्थिरता और अवसर की लहर है। तमिलनाडु की प्रगति के लिए प्रधानमंत्री मोदी का दृष्टिकोण और अटूट समर्थन के लिए धन्यवाद।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 सितंबर को गुजरात के भावनगर में 34,200 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया। भारत के नौवहन क्षेत्र को दोषपूर्ण नीतियों के कारण हुए नुकसान का एक प्रमुख उदाहरण बताते हुए मोदी ने कहा कि भारत ऐतिहासिक रूप से एक अग्रणी समुद्री शक्ति है और दुनिया के सबसे बड़े जहाज निर्माण केन्द्रों में से एक है। भारत के तटीय राज्यों में निर्मित जहाज कभी घरेलू और वैश्विक व्यापार को गति प्रदान करते थे। पचास साल पहले भी, भारत घरेलू निर्मित जहाजों का उपयोग करता था, और 40 प्रतिशत से अधिक आयात-निर्यात इन्हीं के माध्यम से होता था।
प्रधानमंत्री ने वर्तमान विपक्षी दल की आलोचना करते हुए कहा था कि शिपिंग क्षेत्र बाद में उनकी गुमराह नीतियों का शिकार हो गया और घरेलू जहाज निर्माण को मजबूत करने के बजाय, उन्होंने विदेशी जहाजों को भाड़ा देना ज्यादा पसंद किया। उन्होंने कहा कि इससे भारत का जहाज निर्माण तंत्र चरमरा गया और विदेशी जहाजों पर निर्भरता बढ़ गई। नतीजतन, व्यापार में भारतीय जहाजों की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से घटकर सिर्फ 5 प्रतिशत रह गई। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान में भारत का 95 प्रतिशत व्यापार विदेशी जहाजों पर निर्भर है। इस निर्भरता के कारण देश को काफी नुकसान हुआ है।