ICICI: उच्च न्यायालय ने नौ जनवरी को ऋण धोखाधड़ी मामले में दंपति को ''लापरवाह और यांत्रिक'' तरीके से और स्पष्ट रूप से बिना सोचे समझे गिरफ्तार करने के लिए सीबीआई को फटकार लगाई थी और उन्हें अंतरिम जमानत दे दी थी। सीबीआई ने वीडियोकॉन-आईसीआईसीआई बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में कोचर दंपति को 23 दिसंबर, 2022 को गिरफ्तार किया था।
उच्चतम न्यायालय ने आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक चंदा कोचर और उनके कारोबारी पति दीपक कोचर को ऋण धोखाधड़ी मामले में बंबई उच्च न्यायालय से मिली अंतरिम जमानत को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सोमवार को उनसे जवाब मांगा।
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न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने सीबीआई की याचिका पर नोटिस जारी किया और दंपति से तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा। सीबीआई की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि उच्च न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात) पर विचार किए बिना गलत धारणा पर कार्रवाई की जबकि अपराध अधिकतम सात साल के कारावास के साथ दंडनीय है।
पीठ ने राजू से पूछा कि जब यह एक निजी बैंक है तो आईपीसी की धारा 409 कैसे लागू हो गई। राजू ने जवाब दिया कि बैंक निजी हो सकता है लेकिन इसमें जनता का पैसा शामिल है। पीठ ने कहा कि वह नोटिस जारी कर रही है और चंदा कोचर और उनके पति से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।
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उच्च न्यायालय ने नौ जनवरी को ऋण धोखाधड़ी मामले में दंपति को ''लापरवाह और यांत्रिक'' तरीके से और स्पष्ट रूप से बिना सोचे समझे गिरफ्तार करने के लिए सीबीआई को फटकार लगाई थी और उन्हें अंतरिम जमानत दे दी थी। सीबीआई ने वीडियोकॉन-आईसीआईसीआई बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में कोचर दंपति को 23 दिसंबर, 2022 को गिरफ्तार किया था।