उच्चतम न्यायालय ने फ्रैंकलिन टेम्पलटन की छह म्यूचुअल फंड योजनाओं को बंद करने पर ई-वोटिंग की वैधता को मान्यता दी और कहा कि यूनिट धारकों को धन का वितरण जारी रहेगा। न्यायमूर्ति एसए नजीर और संजीव खन्ना की पीठ ने ई-वोटिंग प्रक्रिया के लिए कुछ यूनिट धारकों द्वारा विरोध को खारिज करते हुए कहा कि धन का वितरण शीर्ष अदालत के पहले के आदेश के अनुसार जारी रहेगा।
9122 करोड़ लौटाने का दिया था आदेश
शीर्ष न्यायालय ने दो फरवरी को आदेश दिया था कि फ्रैंकलिन टेम्पलटन की छह म्यूचुअल फंड योजनाओं के यूनिट धारकों को तीन सप्ताह के भीतर 9,122 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाए। न्यायालय ने कहा था कि धन का वितरण यूनिट धारकों की परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी के अनुपात में की जाएगी।
इससे पहले शीर्ष न्यायालय ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) को ई-मतदान प्रक्रिया की देख-रेख के लिए एक पर्यवेक्षक नियुक्त करने को कहा था। फ्रेंकलिन टेम्पलटन की छह म्यूचुअल फंड योजनाओं को बंद करने के संबंध में मतदान दिसंबर के अंतिम सप्ताह में हुआ था और इसे अधिकांश यूनिट धारकों द्वारा अनुमोदित किया गया था।
इन छह योजनाओं का मिलना है पैसा
फ्रैंकलिन टेम्पलटन की जिन योजनाओं का पैसा निवेशकों को वितरित किया जाना हैं, वे हैं- इंडिया लो ड्यूरेशन फंड, फ्रैंकलिन इंडिया अल्ट्रा शार्ट बांड फंड, फ्रैंकलिन इंडिया शार्ट टर्म इनकम प्लान, फ्रैंकलिन इंडिया क्रेडिट रिस्क फंड, फ्रैंकलिन इंडिया डायनैमिक एक्रूअल फंड और फ्रैंकलिन इंडिया इनकम आपुर्चिनिटीज फंड।
कंपनी ने की थी योजना बंद करने की घोषणा
कंपनी ने भुगतान के दबाव और बांड बाजार में नकदी की कमी का हवाला देते हुए 23 अप्रैल 2020 को इन छह म्यूचुअल फंड योजनाओं को बंद करने की घोषणा की थी। नौ दिसंबर को उच्चतम न्यायालय ने सेबी से कहा था कि फ्रैंकलिन टेम्पलटन की छह म्यूचुअल फंड योजनाओं को बंद करने के बारे में दिसंबर के अंतिम सप्ताह में होने वाली ई-वोटिंग प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाए।