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सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त किया RBI का सर्कुलर, अब Cryptocurrency में भी कर पाएंगे लेनदेन

Thu, 05 Mar 2020 04:08 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को क्रिप्टोकरेंसी ( Cryptocurrency ) पर बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर लगे सभी प्रतिबंध हटा दिए हैं। 
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Cryptocurrency
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बैंकिंग लेनदेन में क्रिप्टोकरेंसी और बिटक्वाइन आदि पर पूरी तरह रोक लगाने वाले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सर्कुलर को निरस्त कर दिया है। आरबीआई के निर्णय को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने याचिका दाखिल की थी, जिस पर कोर्ट ने यह फैसला दिया है। इस तरह अब सुप्रीम कोर्ट ने क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेड की अनुमति दे दी है। 

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सुनवाई के दौरान आईएएमएआई ने कहा था कि केंद्रीय बैंक के इस कदम से क्रिप्टोकरेंसी में होने वाली वैध कारोबारी गतिविधियों पर प्रभावी रूप से पाबंदी लग गई है, जिसके जवाब में आरबीआई ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया गया। आरबीआई ने कहा कि उसने क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से मनी लाउंड्रिंग और टेरर फंडिंग के खतरे के मद्देनजर यह कदम उठाया है।
 

भारतीय रिजर्व बैंक ने 2018 में लगाया था बैन

न्यायमूर्ति रोहिंटन नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने क्रिप्टोकरेंसी पर यह अहम निर्णय दिया। पीठ में जस्टिस अनिरुद्ध बोस और वी रामसुब्रमण्यन भी शामिल थे। बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक ने साल 2018 में एक सर्कुलर जारी कर क्रिप्टोकरेंसी कारोबार को बैन किया था। 

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लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने वर्चुअल करेंसी, जिसे क्रिप्टोकरेंसी भी कहते हैं, उससे ट्रेड को मंजूरी दे दी है। अब कोर्ट के इस आदेश के बाद वर्चुअल करेंसी जैसे बिटक्वाइन में कानूनी रूप से लेन-देन किया जा सकता है। 

पूरे विश्व में है कई तरह की वर्चुअल करेंसी

6 अप्रैल 2018 को भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्चुअल करेंसी में ट्रेड पर बैन लगाया था। मौजूदा समय में पूरे विश्व में कई तरह की वर्चुअल करेंसी हैं। इनमें से बिटक्वाइन का मूल्य सबसे अधिक है। मंगलवार को बिटक्वाइन की कीमत 0.39 फीसदी टूटकर 8815 डॉलर पर पहुंच गई थी। इसका मार्केट कैप 161 अरब डॉलर है।

क्या है क्रिप्टोकरेंसी ?

क्रिप्टोकरेंसी एक ऐसी करेंसी है जिसे आप देख नहीं सकते। आसान शब्दों में आप इसे डिजिटल रुपया कह सकते हैं। क्रिप्टोकरेंसी को कोई बैंक जारी नहीं करती है। इसे जारी करने वाले ही इसे कंट्रोल करते हैं। इसका इस्तेमाल डिजिटल दुनिया में ही होता है।

भारत में क्रिप्टोकरेंसी खरीदने-बेचने पर थी 10 साल की जेल

बता दें कि क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध और आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विधेयक, 2019 (Banning of Cryptocurrency and Regulation of Official Digital Currency Bill, 2019) के ड्राफ्ट में यह प्रस्ताव दिया गया था कि देश में क्रिप्टोकरेंसी की खरीद-बिक्री करने वालों को 10 साल की जेल की सजा मिलेगी। ड्राफ्ट के मुताबिक इसकी जद में वे सभी लोग आएंगे जो क्रिप्टोकरेंसी तैयार करेगा, उसे बेचेगा, क्रिप्टोकरेंगी रखेगा, किसी को भेजेगा या क्रिप्टोकरेंसी में किसी प्रकार की डील करेगा। इन सभी मामलों में दोषी पाए जाने वालों को 10 साल तक की जेल की सजा मिलती थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने यह प्रतिबंध हटा दिया है। 

कारोबारियों ने कहा-फैसले से इस कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

क्रिप्टोकरेंसी कारोबारियों ने इसके ट्रेड पर लगी आरबीआई की रोक को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस कदम से देश में इसके विस्तार के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।  पुंडी एक्स के सीईओ जैक चेह ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी पर लगी रोक के हटने से इस तथ्य की पुष्टि हुई कि क्रिप्टो और ब्लॉकचैन भविष्य की तकनीकी हैं।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पु़ंडी एक्स जैसी क्रिप्टो या ब्लॉकचैन कंपनियों के लिए उत्साहजनक है। हमने इस क्षेत्र में काफी काम किया है और भारत जैसे देश में इसके विस्तार के लिए हमें काफी प्रोत्साहन मिलेगा।

बिटबंस के सीईओ गौरव दहके ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देश में एक बड़े इकोसिस्टम को बढ़ावा देगा, जहां इनोवेशन को हमेशा से अहमियत मिलती रही है। साथ ही यह ब्लॉकचैन आधारित प्रोजेक्टों के लिए नए निवेशकों और बेहतर मदद का रास्ता खोलेगा। साथ ही यह और नौकरियां उत्पन्न करने में मददगार साबित होगा। यह हमारा मनोबल बढ़ाने वाला है।

आईबीसी मीडिया के सह संस्थापक और सीईओ रघु मोहन ने कहा कि यह आदेश उन उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए एक कदम है जो क्रिप्टो का उपयोग कर देश में कई जमीनी समस्याओं को हल करने के लिए अभिनव व्यवसाय मॉडल का निर्माण कर रहे हैं। आईबीसी ब्लॉकचैन कंपनियों के लिए मार्केटिंग सॉल्यूशन का काम करती है।

उन्होंने कहा कि देश में क्रिप्टो को विनियमित किए जाने की आवश्यकता है और हम सब इसके लिए काम कर रहे हैं। इस पर कर लगाएं और इसे केवाईसी तथा एंटी मनी लॉन्ड्रिंग के नियमों के तहत लाएं ताकि इसके दुरुपयोग से बचा जा सके। हकीकत में, क्रिप्टो को विनियमित करना फिजिकल नकदी को विनियमित करने से कहीं अधिक आसान है। बंगलूरू की स्प्रिंगवर्क्स कंपनी के सीईओ कार्तिक मांडविले ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला है।  
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क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अंतर मंत्रालयी समिति ने की थी ये सिफारिशें

  • सभी क्रिप्टोकरेंसी का ईजाद गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा किया गया है और इस अर्थ में ये सभी पूरी तरह से निजी उद्यम हैं।
  • इन क्रिप्टोकरेंसी का कोई अंतर्निहित आंतरिक मूल्य नहीं है, उनके पास करेंसी की समस्त विशेषताओं का अभाव है।
  • इन निजी क्रिप्टोकरेंसी का कोई एक तय मूल्य नहीं है यानी न तो मूल्य के किसी भी स्टोर के रूप में कार्य कर सकते हैं और न ही वे विनिमय का एक माध्यम हैं।
  • अपनी शुरुआत के बाद से, क्रिप्टोकरेंसी ने अपनी कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव का प्रदर्शन किया है।
  • ये क्राइटोकरेंसी करेंसी के उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर सकते हैं। निजी क्रिप्टोकरेंसी पैसे या करेंसी के अनिवार्य कार्यों से मेल नहीं खाती, इसलिए निजी क्रिप्टोकरेंसी मौलिक करेंसी की जगह नहीं ले सकती।
  • वैश्विक प्रैक्टिस की समीक्षा से पता चलता है कि इन्हें किसी भी न्यायाधिकार क्षेत्र में कानूनी रूप से मान्यता नहीं दी गई है।
  • सभी एक्सचेंजों, लोगों, व्यापारियों और अन्य वित्तीय प्रणाली प्रतिभागियों को क्रिप्टोकरेंसी से निपटने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
  • इसकी खरीद-फरोख्त करने वालों को 10 साल तक सजा की सिफारिश की गई
  • क्त्रिस्प्टोकरेंसी से संबंधित किसी तरह की गतिविधि में शामिल होने पर 25 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान
  • निजी क्रिप्टो करेंसी को गैर कानूनी घोषित करने और इससे जुड़ी गतिविधियों को आपराधिक कार्रवाई घोषित करने की सिफारिश
  • एक सरकारी डिजिटल करेंसी की शुरुआत करने और इसे आरबीआई के रेगुलेशन में चलाकर कानूनी दर्जा देने की सिफारिश
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