वॉरेन बफे ने एक बार कहा था, खर्च करने के बाद जो बचे उसे मत बचाओ, बचाने के बाद जो बचे उसे खर्च करो। जब पैसों की समझ यानी वित्तीय साक्षरता की बात होती, तो आमतौर पर लोग सिर्फ शेयर, सोना, म्यूचुअल फंड और रियल एस्टेट जैसे निवेशों की ही बात करते हैं। हालांकि, पैसा बढ़ाने के लिए निवेश जरूरी है, लेकिन एक सुरक्षित वित्तीय जीवन की बुनियाद तो बचत ही है। बचत का मतलब सिर्फ खर्च में कटौती करना नहीं है। इसमें समझदारी से फैसले लेना, अच्छी आदतें डालना और जिंदगी के अचानक झटकों के लिए सुरक्षा कवच बनाना शामिल है। आइए बचत के उन पहलुओं को समझते हैं, जिनकी बात कम की जाती है।
100-उम्र...नियम का करें पालन
संपत्ति का सही आवंटन बचत और निवेश की मजबूत बुनियाद होती है। इसके लिए एक आसान नियम है...100 में से अपनी उम्र घटा दें। शेष जो बचेगा, अपने पोर्टफोलियो का उतना फीसदी पैसा इक्विटी में निवेश करें। इसे एक उदाहरण से समझते हैं... अगर आप 30 साल के हैं, तो इस फॉर्मूले के साथ 100 में से 30 घटाने पर 70 बचता है। इस प्रकार, आपको 70 फीसदी राशि इक्विटी यानि शेयर और म्यूचुअल फंड में एवं शेष 30 फीसदी डेट यानि एफडी/पीपीएफ और बॉन्ड में निवेश करना चाहिए। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, आपका ध्यान आक्रामक ग्रोथ के बजाय पूंजी को सुरक्षित रखने पर केंद्रित होना चाहिए।
पैसे की बर्बादी पर नजर न होना बड़ी चुनौती
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि हमारे पास बचत के लायक पैसे नहीं हैं। लेकिन ऐसा है नहीं। असली मुश्किल आय नहीं बल्कि पैसे की बर्बादी पर नजर न होना है। फिजूलखर्जी के तीन प्रमुख स्रोतों की बात करें तो ऑनलाइन शॉपिंग की लत, अक्सर बाहर खाने जाना, बेवजह के सब्सक्रिप्शन। इसके समाधान की बात करें तो आपको हर हफ्ते अपने खर्चों की निगरानी करनी होगी। किसी भी खरीदारी से पहले खुद से पूछें कि क्या आपको वाकई उस चीज की जरूरत है या बस यूं ही खरीद रहे हैं।
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