राज्यों को अगले वित्त वर्ष में जीएसटी क्षतिपूर्ति में तीन लाख करोड़ रुपये कम पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में उन्हें फिर मजबूरन बाजार से ज्यादा कर्ज लेना पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी इक्रा द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार राज्यों को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) क्षतिपूर्ति मद में 2.7 से तीन लाख करोड़ रुपये की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसमें से उपकर संग्रह में कमी 1.6 से दो लाख करोड़ रुपये रह सकती है।
कम से कम 2.2 लाख करोड़ का लेना पड़ेगा कर्ज
वित्त वर्ष 2020-21 में राज्यों को केंद्र से जीएसटी क्षतिपूर्ति में 1.1 लाख करोड़ रुपये की कमी रही, लेकिन 90 फीसदी से अधिक राशि अब जारी कर दी गई है। रेटिंग एजेंसी के अनुसार जीएसटी संग्रह में कमी से राज्यों को बाजार से कम से कम 2.2 लाख करोड़ रुपये और कर्ज लेना पड़ सकता है। इसका मतलब है कि उन्हें 2021-22 में बढ़ी हुई कर्ज सीमा का 90 फीसदी उपयोग करना होगा।
इस संदर्भ में इक्रा के कॉरपोरेट क्षेत्र रेटिंग के समूह प्रमुख जयंत रॉय ने कहा कि, 'केंद्र के 2021-22 के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) अनुमान के आधार पर, हमारा अंदाजा है कि राज्यों द्वारा सकल राज्य घरेलू उत्पाद का एक फीसदी अधिक कर्ज या 2.2 लाख करोड़ रुपये के बराबर कर्ज होगा। क्योंकि हमारा अनुमान है कि केंद्र से राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति में कमी 1.6 से दो लाख करोड़ रुपये होगी। इसके आधार पर, 2021-22 में जीएसटी क्षतिपूर्ति के भुगतान में कमी 2.7 से तीन लाख करोड़ रुपये होगी।'
15वें वित्त आयोग ने की सिफारिश
15वें वित्त आयोग ने सिफारिश की है कि राज्यों की शुद्ध उधारी के लिए सामान्य सीमा 2021-22 में जीएसडीपी का चार फीसदी नियत किया जाए। यह मूल उधारी सीमा तीन फीसदी से अधिक है। आयोग ने वित्त वर्ष 2022-25 के दौरान राज्यों के लिए 0.5 फीसदी अतिरिक्त कर्ज की भी सिफारिश की है। लेकिन यह इस शर्त पर है कि राज्य बिजली क्षेत्र में सुधारों को लागू करेंगे।