अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मंजूर कर्ज की रकम जारी करवाने की जद्दोजहद में जुटी श्रीलंका सरकार ने अब अपने ऊपर मौजूद पूरे कर्ज का ब्योरा जारी किया है। उसने कहा है कि इसका मकसद स्थिति स्पष्ट करना है, ताकि विभिन्न कर्जदाता देशों से रियायत पाने की कोशिश आगे बढ़ सके। आईएमएफ ने कहा है कि कर्जदाता देशों के डेट रिस्ट्रक्चरिंग (कर्ज भुगतान के कार्यक्रम के पुनर्निर्धारण) के बाद ही वह नए कर्ज को जारी करना शुरू करेगा। आईएमएफ श्रीलंका के लिए 2.9 बिलियन का कर्ज मंजूर कर चुका है, लेकिन अभी तक ये रकम जारी नहीं की गई है।
श्रीलंका सरकार की तरफ से जारी विवरण के मुताबिक उस पर बीते 30 जून तक कुल 35 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज था। इसमें द्विपक्षीय, बहुपक्षीय और व्यापारिक ऋण शामिल हैं। इनमें से श्रीलंका को 10.9 बिलियन डॉलर द्विपक्षीय कर्ज लेकर, 9.3 बिलियन डॉलर बहुपक्षीय कर्ज के जरिए, और 14.8 बिलियन डॉलर व्यापारिक ऋण लेकर चुकाना है। श्रीलंका की कुल अर्थव्यवस्था 84.5 बिलियन डॉलर की है।
वेबसाइट इकॉनमीनेक्स्ट.कॉम ने एक रिपोर्ट में बताया है कि राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की सरकार को श्रीलंका पर मौजूद कुल कर्ज का वास्तविक ब्योरा तैयार करने में काफी दिक्कत पेश आई। इसकी वजह यह है कि पिछली सरकारों ने जो कर्ज लिए, उनमें से काफी बड़ी रकम सरकारी उद्यमों के खाते में डाल दी गई थी। जबकि असल में इस कर्ज की देनदारी भी सरकार पर ही है।
श्रीलंका पर चीन के कर्ज की रकम लगभग सात बिलियन डॉलर है। यानी कुल कर्ज में चीनी कर्ज का हिस्सा लगभग 20 फीसदी है। 2009 में श्रीलंका में गृह युद्ध की समाप्ति के बाद से चीन श्रीलंका के लिए कर्ज का एक प्रमुख स्रोत रहा है। इसके बावजूद श्रीलंका पर मौजूद 80 फीसदी कर्ज दूसरे स्रोतों से लिया गया है।
विश्लेषकों के मुताबिक ताजा आंकड़ों को देखते हुए यह आरोप ठीक नहीं है कि श्रीलंका को कर्ज के जाल में फंसाने में मुख्य भूमिका चीन की रही है। चीन ने ज्यादातर कर्ज इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए दिया है। आरोप है कि यह कर्ज इन्फ्रास्ट्रक्चर से संभावित आमदनी का बिना ठोस आकलन किए लिया गया, जिसकी वजह से अब श्रीलंका को उसे चुकाना मुश्किल पड़ रहा है।
श्रीलंका ने बड़े पैमाने पर सॉवरेन (सरकारी) बॉन्ड्स के जरिए लिए हैं। इनमें काफी मात्रा प्राइवेट व्यापारिक स्रोतों से लिए गए ऋण की है। ऐसा कर्ज अपेक्षाकृत महंगा होता है। जबकि बहुपक्षीय एजेंसियों से और द्विपक्षीय समझौतों के तहत से लिया गया कर्ज पर ब्याज दर कम होती है।
द्विपक्षीय कर्जों के मामले में श्रीलंका के प्रमुख स्रोत चीन के अलावा जापान और भारत रहे हैं। बहुपक्षीय ऋण में एशियन डेवलपमेंट बैंक से लिए गए कर्ज का हिस्सा 55 फीसदी है।
श्रीलंका सरकार के अधिकारियों ने कहा है कि कर्जदाताओं के साथ डेट रिस्ट्रक्चरिंग पर बातचीत शुरू हो चुकी है। इस बातचीत के परिणाम से ही तय होगा कि आईएमएफ से कर्ज की अगली किस्त श्रीलंका को कब मिलेगी। खास कर चीन से जारी बातचीत अहम है, क्योंकि आईएमएफ बिना चीन के डेट रिस्ट्रक्चरिंग किए कर्ज जारी करने को तैयार नहीं है।