हिंदुजा परिवार के बीच जारी विवाद का कारण 2014 में हुआ एक पारिवारिक समझौता है। समझौते में कहा गया था कि परिवार का सबकुछ प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित है और कुछ भी किसी से भी संबंधित नहीं है। इस समझौते पर परिवार के चारों भाइयों ने हस्ताक्षर किया था। हालांकि, समझौते के कुछ वर्षों बाद ही सबसे बड़े भाई श्रीचंद हिंदुजा की बेटियों शानू और वीनू ने इसे चुनौती दे दी। उसके बाद श्रीचंद हिंदुजा अपने भाइयों जीपी हिंदुजा, पीपी हिंदुजा और एपी हिंदुजा के खिलाफ कोर्ट पहुंच गए। यह मामला समझौते की वैधता से संबंधित था। वहीं दूसरी ओर, तीन छोटे भाइयों की दलील थी कि यह चिट्ठी 100 वर्ष से अधिक पुराने हिंदुजा ग्रुप की उत्तराधिकार की योजना थी। इस पर कानूनी विवाद नवंबर 2019 से चल रहा है। ब्रिटेन के अलावे यूरोप के कई देशों में हिंदुआ ब्रदर्स के बीच इस कानूनी संघर्ष जारी है। इससे परिवार की साख को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है।
देश में ट्रक (कमर्शियल वाहन) बनाने के कारोबार के अलावे हिंदुजा ग्रुप बैंकिंग, केमिकल्स, पावर, मीडिया और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी है। ग्रुप की कंपनियों में ऑटो कंपनी अशोक लीलैंड और इंडसइंड जैसे बड़े ब्रांड शामिल हैं। 14 अरब डॉलर की नेटवर्थ के साथ हिंदुजा ग्रुप ब्रिटेन का सबसे कारोबारी परिवार है। ग्रुप का कारोबार दुनिया के 38 देशों तक फैला है। कंपनी के पेरोल पर करीब 1.5 लाख कर्मचारी है। हिंदुजा ग्रुप की स्थापना वर्ष 1914 में श्रीचंद परमानंद ने अविभाजित भारत के सिंध प्रांत में की थी। यह समहू कभी कमोडडिटी-ट्रेडिंग फर्म के रूप में कारोबार करता था। लेकिन श्रीचंद और उनके भाइयों ने अपने कुशल प्रबंधन से लगातार अपने कारोबार को दूसरे क्षेत्रों में विस्तारित किया।