भारतीय लघु चाय उत्पादक संघों के परिसंघ (सीआईएसटीए) ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजकर चाय उत्पादकों के विकास को समर्थन देने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की है। पत्र में सीआईएसटीए के अध्यक्ष बिजॉय गोपाल चक्रवर्ती ने कहा कि छोटे चाय उत्पादक (एसटीजी) देश में कुल चाय उत्पादन में प्रतिवर्ष 50 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं।
उन्होंने कहा, "हालांकि, एसटीजी को हरी चाय की पत्तियों की अस्थिर कीमतों, ऋण और उचित वैज्ञानिक सहायता तक सीमित पहुंच के कारण गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है।" चक्रवर्ती ने कहा कि इसके कारण कई एसटीजी मालिक कर्ज के जाल में फंस जाते हैं। समूह ने कहा कि उत्पादन लागत में वृद्धि जारी है, लेकिन कीमतों के संदर्भ में प्राप्ति कम है।
परिसंघ के अनुसार ये एसटीजी पर्याप्त रोजगार सृजन करते हैं। पत्र में कहा गया है कि एस.टी.जी. द्वारा उत्पादित हरी चाय की पत्तियों के लिए न्यूनतम स्थायी मूल्य निर्धारित किया जाना चाहिए, साथ ही उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाया जाना चाहिए और संस्थागत सहायता प्रदान की जानी चाहिए। सीआईएसटीए ने कहा कि केंद्र को अनुसूचित जनजातियों के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनानी चाहिए।