इस महीने की शुरुआत में जारी नवीनतम इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (ईआईयू) वर्ल्डवाइड कॉस्ट ऑफ लिविंग (डब्ल्यूसीओएल) इंडेक्स ने सिंगापुर और न्यूयॉर्क शहर (यूएस) को संयुक्त रूप से "दुनिया का सबसे महंगा शहर" घोषित किया।
तेल अवीव (इज़राइल) जो 2021 में रैंकिंग में सबसे ऊपर था, तीसरे स्थान पर आ गया। तेल अवीव ने पिछले साल "सबसे महंगे शहर" का टैग प्राप्त किया था इसका मुख्य कारण शेकेल का मजबूत होना था। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसमें लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि आई है, संपत्ति की कीमतों में दो वर्षों में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
ईआईयू की रिपोर्ट के अनुसार, इसके सर्वेक्षण में शामिल 172 प्रमुख शहरों में 2022 में रहने की औसत लागत 8.1 प्रतिशत बढ़ गई है। यह 20 वर्षों में डिजिटल कॉस्ट-ऑफ-लिविंग डेटा के अनुसार सबसे तेज दर है। इस वृद्धि का मुख्य कारण रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध है, जिसने अन्य चीजों के साथ-साथ ऊर्जा, भोजन और वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की है। उच्च वैश्विक तेल की कीमतों के बीच पिछले एक साल में स्थानीय मुद्रा में एक लीटर पेट्रोल की कीमत में औसतन 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इसके अलावा, महामारी के कारण भी आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हुई हैं। COVID-19 और युद्ध दोनों ने दुनिया भर में उत्पादन और व्यापार को बड़े पैमाने पर बाधित किया है। हैरानी की बात यह है कि रैंकिंग में पहली बार न्यूयॉर्क भी नंबर एक पर है, जबकि सिंगापुर दस साल में आठवीं बार इस सूची में नंबर एक पर है।