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गुस्से में निवेशक: कोरोना काल में सीईओ की सैलरी इतनी ज्यादा क्यों, अब शेयर होल्डर पूछने लगे सवाल

Fri, 21 May 2021 03:46 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

कोरोना महामारी के समय जब अर्थव्यवस्था एक तरह ढह गई और बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हुए, तब बड़ी कंपनियों के सीईओ के वेतन और भत्तों में भारी बढ़ोतरी पर लोगों का ज्यादा ध्यान गया। उन कंपनियों की आम सभा की जब बैठक हुई, तो इस बारे में शेयर होल्डर बागी मुद्रा में नजर आए...  
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सैलरी - फोटो : For Refernce Only
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विस्तार
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अमेरिका में बड़ी कंपनियों के सीईओ की बेतरतीब तनख्वाह के खिलाफ शेयर धारकों का गुस्सा हाल के समय में तेजी से बढ़ा है। इस बात के संकेत हाल में कई मीडिया रिपोर्टों और थिंक टैंकों के अध्ययनों से मिला है। सीईओ कैसे खुद अपनी ऊंची तनख्वाह तय करते हैं, इस पर पिछले साल खास चर्चा हुई। कोरोना महामारी के समय जब अर्थव्यवस्था एक तरह ढह गई और बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हुए, तब बड़ी कंपनियों के सीईओ के वेतन और भत्तों में भारी बढ़ोतरी पर लोगों का ज्यादा ध्यान गया। उन कंपनियों की आम सभा की जब बैठक हुई, तो इस बारे में शेयर होल्डर बागी मुद्रा में नजर आए।   

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वेबसाइट एक्सियोस.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक कम से कम आठ सीईओ को सैलरी संबंधी सवालों के कारण इस साल इस्तीफा देना पड़ा है। इनमें ज्यादातर ने कंपनी की आम सभा की बैठक के बाद इस्तीफे दिए। इस रिपोर्ट के मुताबिक सैलरी के बारे में सलाह देने वाली एजेंसी आईएसएस ने इस साल सिर्फ 77 फीसदी कंपनी अधिकारियों की तनख्वाह वृद्धि को सही माना था। पिछले साल उसने ऐसे 89 प्रस्तावों को उचित ठहराया था।

एक सलाहकार जेम्स मिलर ने एक टिप्पणी में लिखा है कि कंपनी अधिकारियों की सैलरी बढ़ाने के प्रस्तावों को कम संख्या में मिले समर्थन का कारण इस बारे में पारदर्शिता कम होना है। कंपनी अधिकारियों ने बिना पूरा ब्योरा और सैलरी बढ़ाने के पुख्ता तर्क दिए तनख्वाह बढ़ाने का फैसला किया। वेबसाइट ब्लूमबर्ग के एक विश्लेषण में बताया गया है कि कई मामलों में कंपनी अधिकारियों ने खुद को ज्यादा तनख्वाह के योग्य बताने के लिए सैलरी की गणना का तरीका बदल दिया। सिएटल टाइम्स की खबर के मुताबिक 300 से अधिक कंपनियों ने गणना के तरीकाों में ऐसे बदलाव किए। इसका नतीजा हुआ कि कंपनी अधिकारी करोड़ों डॉलर के बोनस पाने के हकदार हो गए।
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इन्हीं कारणों से दवा बनाने वाली वेगलग्रीन्स नाम की एक कंपनी की आम सभा की बैठक में शेयर धारकों ने वेतन बढ़ाने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इसी तरह एटीएंडटी, स्टारबक्स और जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी के अधिकारियों के वेतन बढ़ाने के प्रस्तावों को भी शेयर धारकों ने नामंजूर कर दिया। विश्लेषकों का कहना है कि वर्षों के बाद ऐसा कोई नजारा कंपनियों की आम सभा की बैठक में दिखा है। उनका कहना है कि शेयर धारकों के मतदान की सीमित भूमिका ही होती है। कंपनी के अधिकारी उनके परिणाम को मानने को कानून बाध्य नहीं होते। लेकिन अधिकारियों के लिए यह भी संभव नहीं होता कि वे शेयर धारकों की भावना की लंबे समय तक अनदेखी करते रहें।

जानकारों के मुताबिक कई कंपनियों में अधिकारियों के वेतन में बढ़ोतरी प्रस्ताव के ठुकराए जाने का संदेश दूसरी कंपनियों तक भी जाता है। इसलिए अनुमान लगाया गया है कि आगे तमाम कंपनियों के अधिकारी इस मामले में सावधानी बरतेंगे। गौरतलब है कि बीते साल भी देखा गया था कि जिन कंपनियों में सीईओ के वेतन प्रस्तावों को मंजूरी मिली वहां भी शेयर धारकों का कम समर्थन उसे मिला। एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक बैंक वेल्स फार्गो एंड कंपनी का ऐसा प्रस्ताव सिर्फ 57 फीसदी शेयर धारकों के समर्थन से पारित हुआ था।

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