कामकाजी लोगों में आ रही कमी
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आ रही गिरावट का सीधा संबंध कामकाजी लोगों की संख्या में आ रही कमी के रूप में भी देखा जा सकता है। 2012 में देश की कुल आबादी में कामकाजी लोगों की संख्या लगभग 50.8 फीसदी थी जो 2014 में 49.9 फीसदी तक आ गई। 2016 में देश के कामकाजी लोगों की संख्या गिरकर 47.8 फीसदी तक पहुंच गई। 2018-19 में कामकाजी लोगों की संख्या 47.3 फीसदी तक पहुंच गई। इस दौरान नौजवानों के कुल रोजगार में भागीदारी में कमी आना बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है।
क्यों आ रही कमी
विशेषज्ञों के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आ रही कमी को पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों, स्टील-सीमेंट सहित सभी धातुओं के मूल्यों में वृद्धि सहित अन्य प्रमुख सामग्रियों की बढ़ती कीमतों के रूप में देखा जा सकता है। कोरोना काल ने बंद हुए उद्योगों की मार को बढ़ा दिया है। नोटबंदी के बाद से अब तक उद्योगों के पास नकदी की कमी को दूर नहीं किया जा सका है। यह भी उद्योगों के गति न पकड़ने का सबसे बड़ा कारण है।
कैसे दूर होगी यह कमी
आर्थिक मामलों के जानकार और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने अमर उजाला से कहा कि उद्योग जगत के सामने नकदी की उपलब्धता बड़ा संकट थी, लेकिन सरकार ने तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का सस्ता और आसान कर्ज उपलब्ध कराकर इस संकट को दूर करने का काम किया है। कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधियां सुस्त पड़ी थीं, लेकिन जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था खुली है, इसमें गति आ रही है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि देश की अर्थव्यवस्था जल्द ही गति पकड़ेगी और नौकरियों का संकट भी खत्म होगा।