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RBI: सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी से सात राज्यों ने जुटाए 13300 करोड़ रुपये; मध्य प्रदेश को सबसे अधिक लाभ

Wed, 09 Jul 2025 12:34 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सात प्रमुख भारतीय राज्यों ने राज्य सरकार प्रतिभूतियों (एसजीएस) की नीलामी के नवीनतम दौर में कुल 13,300 करोड़ रुपये जुटाए।
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आरबीआई (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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राज्य सरकार की प्रतिभूतियों (एसजीएस) की ताजा नीलामी में देश के सात राज्यों ने कुल 13,300 करोड़ रुपये जुटाए। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार सभी राज्यों ने अपनी अधिसूचित पूरी राशि स्वीकार कर ली। 

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मध्य प्रदेश ने जुटाए 4,800 करोड़ रुपये

मध्य प्रदेश सबसे आगे, इसने दो प्रतिभूतियों के जरिए ₹4,800 करोड़ जुटाए। राज्य ने 16 साल की अवधि पर 7.14% और 18 साल की अवधि पर 7.15% का उच्चतम यील्ड ऑफर किया, जो इस दौर में सबसे ज्यादा था। इसके बाद महाराष्ट्र ने ₹4,000 करोड़ जुटाए, जो दूसरे स्थान पर रहा। राज्य ने 20 और 21 साल की अवधि वाली दो प्रतिभूतियां जारी कीं। इन पर 7.14% यील्ड मिल रहा है। बिहार ने इस नीलामी दौर में सबसे कम प्रतिफल पर 2,000 करोड़ रुपये जुटाए। राज्य ने 6.88 प्रतिशत की दर से 10 साल की प्रतिभूति की पेशकश की, जो ब्याज लागत के लिहाज से सबसे किफायती सौदा रहा। 

तेलंगाना ने सबसे लंबी अवधि की प्रतिभूति जारी की 

अन्य प्रतिभागियों में हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, मिजोरम और तेलंगाना भी शामिल रहे। हरियाणा ने 16 साल की अवधि की प्रतिभूति पर 7.12% यील्ड के साथ ₹1,000 करोड़ जुटाए।जम्मू-कश्मीर और मिजोरम दोनों ने 15 साल की प्रतिभूतियों पर 7.14% यील्ड के साथ क्रमश: ₹400 करोड़ और ₹100 करोड़ रुपये जुटाए। तेलंगाना ने सबसे लंबी अवधि 30 साल की प्रतिभूति जारी की और  7.13% यील्ड पर 1,000 करोड़ रुपये जुटाए।

पूंजीगत खर्च और राजकोषीय जरूरतों को पूरा करने में मिली मदद 

यह यील्ड-आधारित नीलामी आरबीआई के नियमित कर्ज कार्यक्रम के तहत आयोजित की गई। इससे राज्यों को पूंजीगत खर्च और राजकोषीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली।आंकड़ों से पता चला कि विभिन्न अवधियों में निवेशकों की मांग मजबूत रही और सभी राज्यों ने बिना किसी अंडर-सब्सक्रिप्शन के अपने इच्छित राशि को जुटाने में सफल रहे। राज्यों के लिए यह नीलामियां बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण का एक प्रमुख तरिका है। जिससे वे केंद्रीय बैंक की व्यापक आर्थिक ढांचे के तहत राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हैं।

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