प्रतिस्पर्धी परिस्थितियों और कीमतों के दबाव के बीच उत्पादन और नए कारोबार में नरम वृद्धि से देश में सेवा क्षेत्र की वद्धि दर अक्टूबर में गिरकर सात महीने के निचले स्तर पर आ गई। मौसमी रूप से समायोजित एसएंडपी ग्लोबल इंडिया सर्विसेज पीएमआई बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स अक्टूबर में गिरकर 58.4 पर आ गया, जो सितंबर में 13 साल के उच्च स्तर 61 पर था, यह मार्च के बाद से विस्तार की सबसे धीमी दर का संकेत है।
परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) की भाषा में 50 से ऊपर का सूचकांक विस्तार को दर्शाता है जबकि 50 से नीचे का स्कोर संकुचन को दर्शाता है। यह सर्वेक्षण सेवा क्षेत्र की करीब 400 कंपनियों के पैनल को भेजी गई प्रश्नावली के जवाब से तैयार किया गया है।
एसऐंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस की इकनॉमिक्स असोसिएट डायरेक्टर पॉलियाना डी लीमा ने कहा, 'कई कंपनियां नए कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने में कामयाब रहीं, लेकिन कुछ ने अपनी सर्विसेज की डिमांड कम होने और कॉम्पिटिटिव कंडीशन का जिक्र किया।
अक्टूबर के आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर 2014 में शृंखला शुरू होने के बाद से भारतीय सेवा कंपनियों को दिए गए अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर में दूसरी सबसे तेज वृद्धि हुई है। सर्वेक्षण के सदस्यों ने एशिया, यूरोप और अमेरिका में ग्राहकों से लाभ का उल्लेख किया।
लीमा ने कहा, "अक्टूबर में निर्यात विशेष मजबूती वाला क्षेत्र रहा और एशिया, यूरोप और अमेरिका से नए कारोबारी लाभ से वृद्धि दर नौ साल के इतिहास में दूसरे स्थान पर पहुंच गई।" कीमत के मोर्चे पर, भारत में सेवा कंपनियों ने अक्टूबर में अपने खर्चों में वृद्धि की, जिसके लिए उन्होंने उच्च भोजन, ईंधन और कर्मचारियों पर खर्च को जिम्मेदार ठहराया।
रिपोर्ट में कहा गया है, "हालांकि सर्वेक्षण में भाग लेने वालों ने इन अतिरिक्त लागत बोझ को ग्राहकों पर डाल दिया, लेकिन शुल्क में वृद्धि बिक्री वृद्धि में गिरावट का कारण हो सकती है। इसके अलावा अक्टूबर में मुद्रास्फीति बढ़ने से कारोबारी विश्वास भी प्रभावित हुआ।
इस बीच, एसएंडपी ग्लोबल इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स सितंबर के 61 से गिरकर अक्टूबर में 58.4 हो गया, जो मार्च के बाद से विस्तार की सबसे कमजोर दर को दर्शाता है। सर्वेक्षण के अनुसार, "हालांकि भारत ने कुल कारोबारी गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करना जारी रखा है, लेकिन विनिर्माण उत्पादन और सेवा गतिविधियों में धीमी वृद्धि के बीच अक्टूबर में इसमें मजबूती आई है। भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए लगाए गए मूल्य अक्टूबर में और बढ़ गए, जिससे मुद्रास्फीति का वर्तमान क्रम लगभग तीन साल तक के लिए बढ़ गया।"