मांग स्थितियों में सुधार तथा मौजूदा संसाधनों पर दबाव के मद्देनजर, सेवा प्रदाताओं ने जून 2011 के बाद सबसे तेज गति से अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर अपनी क्षमता का विस्तार किया। डोढिया ने कहा कि अर्थव्यवस्था को औपचारीकरण के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के प्रतिक्रियास्वरूप ज्यादा से ज्यादा लोगों का झुकाव रोजगार की तरफ हो रहा है, जो पीएमआई के नवीनतम आंकड़ों से जाहिर होता है। वास्तव में, रोजगारों का सृजन जून 2011 के बाद सबसे तेज गति से हुआ।
उच्च लागत का दबाव कायम
सर्वेक्षण के मुताबिक, कीमत के मोर्चे पर, देश के सेवा क्षेत्र की कंपनियों को मार्च महीने के दौरान भी उच्च लागत के बोझ को वहन करना पड़ा। इस बीच, घटती खुदरा महंगाई तथा विकास दर को रफ्तार देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) पर नीतिगत दरों में कटौती का दबाव बढ़ रहा है।
आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने बृहस्पतिवार को वित्त वर्ष 2018-19 की पहली द्वि-मासिक मौद्रिक नीति का एलान किया। आरबीआई ने हालांकि नीतिगत दरों पर यथास्थिति कायम रखा।
आरबीआई ने अपनी पहली तीन बैठकों में नीतिगत दरों पर यथास्थिति को कायम रखा था। समिति ने बीते साल अगस्त में नीतिगत दर में 0.25 फीसदी की कटौती कर उसे छह फीसदी पर ला दिया था, जिसके साथ ही वह छह साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई।