पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति व विनिमय बोर्ड (सेबी) के कर्मचारियों के एक समूह ने गुरुवार को मुंबई स्थित सेबी मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सेबी की ओर से जारी उस प्रेस वक्तव्य पर आपत्ति जताई, जिसमें वित्त मंत्रालय को लिखे गए उनके पिछले पत्र को गैर-पेशेवर करार दिया गया था।
पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति व विनिमय बोर्ड (सेबी) के कर्मचारियों के एक समूह ने गुरुवार को मुंबई स्थित सेबी मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सेबी की ओर से जारी उस प्रेस वक्तव्य पर आपत्ति जताई, जिसमें वित्त मंत्रालय को लिखे गए उनके पिछले पत्र को गैर-पेशेवर करार दिया गया था और कहा गया था कि बाहरी तत्वों की ओर से सेबी कर्मचारियों को गुमराह किया गया।
गुरुवार को करीब दो घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन में लगभग 200 कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। इस विरोध प्रदर्शन में जिसमें कर्मचारियों ने प्रेस विज्ञप्ति को तुंरत वापस लेने और सेबी चेयरपर्सन माधवी पुरी बुच के इस्तीफे की मांग की। उधर, सेबी ने अपने बचाव में गैर पेशेवर कार्य संस्कृति तथा खराब वातावरण के दावों का खंडन करते हुए कर्मचारियों को गलत बताया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले महीने, सेबी के कर्मचारियों ने वित्त मंत्रालय को पत्र लिखकर नियामकीय संस्था पर अत्यधिक काम के दबाव की शिकायत की थी। तरकीबन 500 कर्मचारियों के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र में कहा गया था कि सेबी का माहौल तनावपूर्ण और काम करने का वातावरण खराब हो गया है।
इस पत्र की खबर सामने आने के बाद सेबी ने एक बयान जारी कर कर्मचारियों की चिंताओं के पीछे बाहरी प्रभावों को जिम्मेदार ठहराया। बयान के अनुसार उच्च किराये भत्ते की मांग और आंतरिक कार्य प्रदर्शन मानकों की आलोचनाओं के लिए कर्मचारियों को भड़काया गया। सेबी ने यह भी दावा किया कि बाहरी तत्वों ने कर्मचारियों को जवाबदेही और प्रदर्शन मानकों को अस्वीकार करने के लिए प्रभावित किया।
बता दें कि सेबी चेयरपर्सन का यह विरोध ऐसे समय पर हो रहा है जब उन पर हिंडनबर्ग और कांग्रेस पार्टी ने कई आरोप लगाए हैं। अमेरिका स्थित शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च और विपक्षी राजनीतिक दल ने बुच पर अदाणी समूह से जुड़े ऑफशोर फंड में निवेश करने का आरोप लगाया है। इसकी जांच वर्तमान में सेबी कर रही है। वहीं, खुद बुच ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है।
देश के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने दावा किया है कि सेबी में शामिल होने के बाद भी बुच को आईसीआईसीआई बैंक से आय प्राप्त होती रही, जहां वह पहले कार्यरत थीं। हालांकि आईसीआईसीआई बैंक ने इन दावों का खंडन किया है। बुच और सेबी दोनों की ओर से अब तक इस मसले पर कोई टिप्पणी नहीं आई है। सेबी ने इस सब के बीच अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि हम अपने परिचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।