Co-Location Case: एनएसई, रामकृष्ण और नारायण के अलावा सेबी ने आनंद सुब्रमण्यन, रवींद्र आप्टे, उमेश जैन, महेश सोपारकर और देवीप्रसाद सिंह के खिलाफ आरोप हटा दिए हैं। यह मामला को-लोकेशन घोटाले से जुड़ा है, जिसमें कुछ ब्रोकरों पर एनएसई के सिस्टम, डेटा और ट्रेडिंग सुविधाओं तक तेजी से पहुंच हासिल करके अनुचित लाभ उठाने के आरोप लगे थे।
सेबी ने शुक्रवार को एनएसई और उसके सात पूर्व कर्मचारियों, जिनमें चित्रा रामकृष्ण और रवि नारायण शामिल हैं, के खिलाफ को-लोकेशन सुविधा के मामले में नियामक उल्लंघन के आरोपों को पर्याप्त सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए खारिज कर दिया।
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सेबी ने अपने 83 पृष्ठ के आदेश में कहा, "इस मामले में रिकार्ड पर पर्याप्त सामग्री/साक्ष्य/वस्तुनिष्ठ तथ्यों के अभाव के कारण, ओपीजी और उसके निदेशकों व नोटिस प्राप्तकर्ता (एनएसई और उसके सात कर्मचारी) के बीच मिलीभगत/सांठगांठ की पुष्टि के लिए के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है।" एनएसई, रामकृष्ण और नारायण के अलावा सेबी ने आनंद सुब्रमण्यन, रवींद्र आप्टे, उमेश जैन, महेश सोपारकर और देवीप्रसाद सिंह के खिलाफ आरोप हटा दिए हैं।
यह मामला को-लोकेशन घोटाले से जुड़ा है, जिसमें कुछ ब्रोकरों ने एनएसई के सिस्टम, डेटा और ट्रेडिंग सुविधाओं तक तेजी से पहुंच हासिल करके अनुचित लाभ उठाया था। एनएसई ने 2009 में कोलोकेशन सुविधा शुरू की थी, जिसके तहत व्यापारियों और ब्रोकरों को शुल्क लेकर अपने आईटी सर्वर को इसके परिसर में स्थापित करने की अनुमति दी गई थी।
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2015 में एक व्हिसलब्लोअर ने आरोप लगाते हुए कहा था कि कुछ ब्रोकर्स ने डेटा तक तेजी से पहुंच की सुविधा का उपयोग करके बाजार में हेरफेर किया गया। शिकायत में कहा गया है कि ओपीजी सिक्योरिटीज को एनएसई के बैकअप सर्वर तक तरजीही पहुंच मिली और रवि नारायण तथा चित्रा रामकृष्ण ने ओपीजी की ओर से की गई धोखाधड़ी में मदद की। हालांकि मामलों को खारिज करने के बावजूद सेबी ने आदेश में कहा, "इस तथ्य पर कोई विवाद नहीं है कि एनएसई के पास कोलोकेशन सुविधाओं के उपयोग के लिए कोई विस्तृत परिभाषित नीति नहीं थी।"