भारतीय प्रतिभूति व विनिमय बोर्ड (सेबी) के एक बयान के अनुसार यह रूपरेखा बाजार प्रतिभागियों, नियामकों, क्लाउड एसोसिएशनों, क्लाउड सेवा प्रदाताओं (सीएसपी), सरकारी एजेंसियों और सेबी सलाहकार समितियों के साथ किए गए अध्ययन, सर्वेक्षण और परामर्श पर आधारित है।
बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने स्टॉक एक्सचेंजों, क्लियरिंग कॉरपोरेशन और अन्य इकाइयों की ओर से क्लाउड सेवाओं को अपनाने के लिए एक सिद्धांत-आधारित ढांचा पेश किया है।
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भारतीय प्रतिभूति व विनिमय बोर्ड (सेबी) के एक बयान के अनुसार यह रूपरेखा बाजार प्रतिभागियों, नियामकों, क्लाउड एसोसिएशनों, क्लाउड सेवा प्रदाताओं (सीएसपी), सरकारी एजेंसियों और सेबी सलाहकार समितियों के साथ किए गए अध्ययन, सर्वेक्षण और परामर्श पर आधारित है।
सेबी के एक बयान के अनुसार क्लाउड फ्रेमवर्क स्केलेबिलिटी, कम परिचालन लागत, डिजिटल परिवर्तन और कम सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) बुनियादी ढांचे की जटिलता के माध्यम से व्यावसायिक संभावनाओं को बढ़ाने और क्लाउड कंप्यूटिंग को अपनाने के लिए विनियमित इकाई (आरई) की ओर से पूरा की जाने वाली अनिवार्य जरूरतों का समाधान है। इसमें नौ उच्च-स्तरीय सिद्धांत हैं जो क्लाउड अपनाने से जुड़े जोखिमों पर प्रकाश डालता है और आवश्यक अनिवार्य नियंत्रणों की सिफारिश करता है।
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दस्तावेज में (आरई और सीएसपी द्वारा) कार्यान्वित किए जाने वाले आवश्यक आधारभूत सुरक्षा उपायों की भी सिफारिश की गई है, और आरई सेबी द्वारा समय-समय पर जारी सभी लागू परिपत्रों / दिशानिर्देशों / परामर्शों आदि में अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं, प्रौद्योगिकी जोखिम मूल्यांकन, जोखिम उठाने की क्षमता, अनुपालन आवश्यकताओं के अनुसार अतिरिक्त उपायों को जोड़ने का निर्णय ले सकता है।
बयान में कहा गया है कि आरई क्लाउड कंप्यूटिंग के लिए प्रभावी शासन, जोखिम और अनुपालन (जीआरसी) उप-ढांचा स्थापित करेगा ताकि संस्थान अपनी परिस्थितियों या जरूरतों के लिए उपयुक्त क्लाउड रणनीति तैयार कर सकें। संशोधित नियम से सेबी की ओर से जारी विभिन्न परिपत्रों में उल्लिखित शासन के ढांचे का भी पालन हो सकेगा।