सेबी प्रमुख ने एशिया के सबसे पुराने शेयर बाजार बीएसई में निवेशक जोखिम बचाव पहुंच मंच शुरू किए जाने के दौरान पूंजी बाजार नियामक के एक हालिया शोध पत्र का जिक्र किया। इसके मुताबिक, एफएंडओ में 45.24 लाख कारोबारियों में से सिर्फ 11 फीसदी ने लाभ कमाया है।
नुकसान के बावजूद निवेशकों की वायदा एवं विकल्प खंड (एफएंडओ) में बढ़ती रुचि समझ से बाहर है। यह स्थिति तब है, जब एफएंडओ में निवेश करने वाले 90 फीसदी लोगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच ने सोमवार को कहा कि महामारी के दौरान एफएंडओ खंड में निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। व्यक्तिगत कारोबारियों की कुल संख्या 2018-19 के 7.1 लाख की तुलना में 500 फीसदी से अधिक बढ़ गई है।
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11 फीसदी ने ही कमाया लाभ
सेबी प्रमुख ने एशिया के सबसे पुराने शेयर बाजार बीएसई में निवेशक जोखिम बचाव पहुंच मंच शुरू किए जाने के दौरान पूंजी बाजार नियामक के एक हालिया शोध पत्र का जिक्र किया। इसके मुताबिक, एफएंडओ में 45.24 लाख कारोबारियों में से सिर्फ 11 फीसदी ने लाभ कमाया है।
500% से अधिक बढ़ी है 2018-19 की तुलना में व्यक्तिगत कारोबारियों की संख्या
2011-12 में एफएंडओ में 89 फीसदी लोगों ने पैसा गंवाया। उनका औसत नुकसान 1.1 लाख था। कुछ लोग भाग्यशाली थे, जिनका औसत लाभ 1.5 लाख रुपये था। एफएंडओ में एक तिहाई से अधिक निवेशकों की उम्र 20-30 साल है। 2018-19 में संख्या सिर्फ 11 फीसदी थी।
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लंबी अवधि में महंगाई से अधिक मिलेगा रिटर्न
बुच ने कहा, उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि बाजार में दीर्घकालिक नजरिये से लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं, शायद ही आप कभी गलत होंगे। निवेशक लंबे समय तक बाजार में टिकता है तो उसका रिटर्न अर्थव्यवस्था में महंगाई की दर से अधिक होगा। निवेशक दीर्घकालिक नजरिया अपनाएं। एफएंडओ में हर दिन अपना पैसा खोने से अच्छा लंबी अवधि का निवेश है, जिसमें अच्छे रिटर्न की बेहतर संभावना है।