पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सूचीबद्ध कंपनियों में चेयरपर्सन और प्रबंध निदेशक (एमडी)/मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद अलग-अलग करने के अपने फैसले को बदल दिया है। इसके तहत अब चेयरपर्सन और एमडी/सीईओ के पदों को अलग करना जरूरी नहीं होगा। इसे स्वैच्छिक आधार पर लागू किया जाएगा। इससे पहले भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पिछले आदेश में सूचीबद्ध शीर्ष- 500 कंपनियों के लिए इन पदों को एक अप्रैल, 2022 से अलग-अलग करना अनिवार्य किया था।
नियामक ने निदेशक मंडल की बैठक के बाद कहा कि उसके बोर्ड ने यह फैसला किया है कि सूचीबद्ध कंपनियों के लिए चेयरपर्सन और एमडी/सीईओ के पदों को अलग करने का प्रावधान अनिवार्य की जगह स्वैच्छिक होगा। कंपनियां अब अपनी जरूरत के हिसाब से चेयरपर्सन और एमडी/सीईओ का पद अलग-अलग या एक साथ रख सकती हैं।
दरअसल, जून, 2017 में सेबी कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर उदय कोटक की अगुवाई में एक समिति बनाई थी। समिति ने चेयरपर्सन और एमडी/सीईओ के पदों को अलग-अलग करने का सुझाव दिया था। नियामक ने मई, 2018 में इन पदों को अलग करने के नियम पेश किए थे। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि अगर भारतीय कंपनियों के इस मामले में कोई विचार हैं तो नियामक को इस पर गौर करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने साफ किया था कि वह कोई निर्देश नहीं दो रही हैं।
कारोबारी सुगमता बढ़ाने के लिए सुधारों पर ध्यान दे सेबी : वित्तमंत्री
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए सेबी को अगली पीढ़ी के सुधारों पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कदमों का बाजार पर पड़ने वाले असर से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। सेबी के निदेशक मंडल को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा कि नियामक की ओर से उठाए गए कदम प्रशंसनीय हैं।
हालांकि, अभी नियमों के अनुपालन बोझ को कम करने, बाजार मध्यस्थता की लागत के अलावा निवेशकों के हितों के अधिक सुरक्षित करने की दिशा में बहुत कुछ करने की जरूरत है। उन्होंने कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को मजबूती देने और ग्रीन वॉन्ड बाजार के विकास की दिशा में भी प्रयास करने को कहा है।