अमर उजाला संवाद के मंच पर शुक्रवार को विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गज जुटे। बाजार: क्या करें, क्या न करें सत्र के दौरान कोटक म्यूचुअल फंड के सीईओ नीलेश शाह और व्हाइट ओक कैपिटल मैनेजमेंट के सीईओ आशीष सोमैया ने भी अपनी राय रखी। इस दौरान उन्होंने बताया कि बाजार में आपका निवेश कैसा होना चाहिए। उन्होंने इसे क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली के उदारण से भी समझाया। उन्होंने निवेशकों के लिए क्या टिप्स दिए जानिए।
बाजार में निवेशकों का मन कैसे समझा जाए?
बाजार में निवेशकों का मन कैसे समझा जाए? इस सवाल के जवाब में बोलते हुए नीलेश शाह ने बताया कि निवेशकों का मन समझना ये एक जर्नी है। और मन से उनका दिल जीतना जरूरी है। उन्होंने कहा, "बहुत समय तक मुझे लगा था कि मैं तो म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में लोगों के पैसे मैनेज करने के लिए आया हूं। कुछ समय बात यह समझ में आया कि मैं पैसों से ज्यादा लोगों का भरोसा मैनेज करने के लिए आया हूं। भरोसा कमाने में जिंदगी निकल जाती है और गंवाने के लिए एक क्षण काफी है। निवेशकों का भरोसा जीतना जरूरी है। कई बार हम लोगों का नुकसान करते हैं। लोगों का पैसा चला जाता है। पर जब तक लोगों का भरोसा हम पर है, वे पैसा हमारे पास रखते हैं। ये भरोसे की इंडस्ट्री है। पैसा मैनेज करने की इंडस्ट्री नहीं है। हमें अपने चाल-चलन से निवेशकों को विश्वास देना पड़ेगा कि हम उनके भरोसे का जतन करेंगे। व्हाइट ओक कैपिटल मैनेजमेंट के सीईओ आशीष सोमैया ने भी भरोसे को बाजार का अभिन्न अंग बताया।
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नीलेश शाह ने बताया निवेश कैसा हो?
निवेश कैसा हो? निवेशक को गिरावट की स्थिति में वैल्यू चुनना चाहिए या ग्रोथ चुनना चाहिए? इस बारे में बोलते हुए नीलेश ने कहा कि एक फंड मैनेजर के तौर पर हमारा काम होता है पैसा बनाना। अगर पैसा वैल्यू चुनकर बनता है तो वैल्यू चुननी चाहिए। अगर पैसा ग्रोथ चुनने पर बने तो हमें ग्रोथ चुननी चाहिए। उन्होंने क्रिकेट जगत के दिग्गज सचिन और सौरव का उदाहरण दिया।
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सचिन और सौरव का उदाहरण देकर क्या बोले निवेश जगत के दिग्गज?
उन्होंने कहा कि सौरव गांगुली बाएं हाथ के बल्लेबाज थे लेकिन सचिन तेंदुलकर दाएं हाथ के बल्लेबाज थे। अब सौरव गांगुली ऑफ साइड पर मजबूत थे। वहां पर वह महाराजा थे। किसी भी बॉल पर वे 10 फील्डर के बीच से गेंद निकाल सकते थे। ऑन साइड पर वह उतना अच्छा नहीं खेलते थे। हम फंड मैनेजर्स की भी इस तरह की एक पहचान बन जाती है। जो वैल्यू इन्वेस्टर हैं, वो वैल्यू में अच्छा काम कर पाएगा। लेकिन अगर सौरव गांगुली ऑन साइड पर खेलते ही नहीं, तो उनका करियर इतना लंबा नहीं चलता। उन्होंने अपने आप को ऑन साइड पर खेलने के लिए तैयार किया। ऑफ साइड के महाराजा थे, लेकिन ऑन साइड पर भी रन तो बना लेते थे। इसी तरह, एक फंड मैनेजर के तौर पर हमें भी किसी भी बंधन के अंदर खुद को नहीं जकड़ना चाहिए। जब वैल्यू चले तो हमें वैल्यू लेना चाहिए। जब ग्रोथ चले तो हमें ग्रोथ लेना चाहिए। नीलेश ने बताया कि मैंने हमेशा पैसा बनाने के लिए पैसों का निवेश किया है। फिर चाहे वह वैल्यू हो या ग्रोथ। इस तरह उन्होंने क्रिकेट का उदाहरण देकर अमर उजाला के मंच पर निवेश का फंडा समझाया।