एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत के विकास अनुमान को 7.1 फीसदी से घटाकर 6.3 फीसदी कर दिया है। हालांकि वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने कहा कि 2020-21 में इसके बढ़कर सात फीसदी के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है।
एसएंडपी ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए अपनी तिमाही रिपोर्ट में कहा, ‘भारत की में सुस्ती खासी ज्यादा है और हमारी उम्मीद से ज्यादा व्यापक है। मार्च-जून तिमाही में आर्थिक विकास दर अनुमान से कुछ ज्यादा ही कम पांच फीसदी रही थी। सबसे ज्यादा आगाह करने वाली बात यह है कि इस तिमाही में निजी उपभोग की वृद्धि दर घटकर महज तीन फीसदी रह गई है, जिसे हाल के वर्षों में विकास के इंजन के तौर पर देखा जाता रहा है।’ रेटिंग एजेंसी ने कहा कि परिवारों का आत्मविश्वास सुस्त बना हुआ है और खर्च को बरकरार रखने के लिए बचत में सुस्ती को देखते हुए आगे ज्यादा सावाधानी बरते जाने के संकेत हैं।
अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सरकार के कॉर्पोरेट कर में कमी के फैसले पर एसएंडपी ने कहा कि इससे जीडीपी की तुलना में सरकारी खजाने पर 0.7 फीसदी का बोझ पड़ेगा। हालांकि एजेंसी ने कहा कि सरकार के कई रियायतें वापस लिए जाने से इसका फायदा खासा सीमित होगा।
आरबीआई की आगामी मौद्रिक समीक्षा पर एसएंडपी ने कहा कि महंगाई दर में नरमी के मद्देनजर आगे भी रेपो दर में कमी देखने को मिल सकती है।