मुख्य आर्थिक सलाहकार की दखल के बाद वैश्विक रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स (एसएंडपी) के भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति रुख में नरमी आई है। रेटिंग एजेंसी ने शुक्रवार को कहा कि भारत में 6.5-7 फीसदी विकास दर बढ़ाने की क्षमता है और सुधारों को ठीक ढंग से लागू किया जाए तो अर्थव्यवस्था को दबाव से बाहर निकाला सकता है।
इससे पहले एसएंडपी ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को बीबीबी(-) पर स्थिर रखते हुए निवेश की रेटिंग 13 साल में सबसे कम कर दी थी। इस पर मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमणियम ने बृहस्पतिवार को कहा था कि भारत की कर्ज चुकाने की क्षमता काफी बेहतर है और वह बेहतर रेटिंग का हकदार है। अब एसएंडपी ने कहा है कि इस साल तो भारत की जीडीपी का आकार घटेगा लेकिन आगे उसका प्रदर्शन अन्य देशों के मुकाबले बेहतर रहेगा। एसएंडपी के निदेशक (एपीएसी) एंड्रयू वुड ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है और भारत से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। हालांकि, अगर कोविड-19 के प्रभावों का असर उस पर लंबे समय तक रहता है तो हमारी एजेंसी उसकी रेटिंग में कटौती जारी रखेगी।
संक्रमण के बढ़ते मामलों से अर्थव्यवस्था पर जोखिम, ऑटो क्षेत्र का बुरा हाल : आईएचएस मार्किट
वैश्विक सूचना प्रदाता फर्म आईएचएस मार्किट ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए कहा है कि लॉकडाउन में राहत के बाद यह स्थिति अर्थव्यवस्था पर जोखिम बढ़ा रही है। करीब तीन महीने के लॉकडाउन ने पहले ही उद्योगों को बेहाल कर दिया है। अगर संक्रमण का प्रसार नहीं थमा तो ऑटो क्षेत्र सहित कई उद्योगों को भयंकर मार पड़ने की आशंका है। फर्म ने कहा, अप्रैल में भारत का सकल उत्पादन सूचकांक 7.2 पहुंच गया था, जो 14.5 साल के सर्वे के इतिहास में सबसे कम है। इस दौरान विनिर्माण और सेवा दोनों ही क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। भारत में अधिक जनसंख्या और कमजोर चिकित्सा प्रणाली की वजह से स्थिति खतरनाक हो सकती है, जो दोबारा लॉकडाउन की ओर इशारा करता है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र पर इसकी भीषण मार पड़ेगी जो सियाम के मुताबिक पहले ही 30 करोड़ डॉलर रोजाना का नुकसान सह रहा है। 2019 में यात्री वाहनों की सालाना बिक्री 12.7 फीसदी और वाणिज्यिक वाहनों की 15 फीसदी कम रही थी।
सरकार ने आर्थिक स्थिति पर बीमा कंपनी का सर्वे खारिज किया
सरकार ने देश की आर्थिक स्थिति पर बीमा कंपनी जनरली के सर्वे को खारिज करते हुए कहा है कि सिर्फ 599 लोगों की राय किसी भी तरह से पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं करती। सर्वे में दावा किया गया था कि लॉकडाउन से 80 फीसदी भारतीयों की आय में नुकसान हुआ है। यह सर्वे 27 मार्च से 31 मार्च के बीच किया गया था। सरकार ने इसका खंडन करते हुए कहा है कि तीन महीने पहले जो परिस्थतियां थीं, वे आज काफी भिन्न हैं। जनरली का सर्वे ऑनलाइन था, जिसमें सिर्फ 599 लोगों से बात की गई है। इस तरह के सर्वे में हितों के टकराव की संभावना रहती है और इसकी व्यापकता बहुत कम है।