कोठारी के एक दूसरे मित्र ने बताया कि उन्हें डॉलर खरीदने-बेचने का भी काफी शौक था। वो ऐसे ग्रुप से जुड़े हुए थे, जिनमें चार-पांच लोग थे जो इस तरह का सट्टा खेलते थे। हालांकि इस खेल में कोठारी को हमेशा नुकसान ही हुआ, लेकिन तब भी उससे उनका जुड़ाव कम नहीं हुआ।
एक समय में रोटोमैक ने डॉलर ट्रेड में 1100 करोड़ रुपये का नुकसान भी उठाया। इसमें से 400 करोड़ रुपये कोठारी के खुद के थे। इसके बाद से कोठारी के बुरे दिन शुरू हो गए थे।
ऐसे बने पेन किंग से कर्ज किंग
बैंक को हजारों करोड़ रुपये की चपत लगाने वाले विक्रम कोठारी की कहानी बड़ी दिलचस्प है। देश-दुनिया में कोठारी परिवार की पहचान पान मसाले के ब्रांड पान पराग से बनी। मनसुख भाई कोठारी ने बेटों दीपक कोठारी और विक्रम कोठारी के साथ वर्ष-1975 में पुड़िया वाला पान मसाला बनाकर बेचना शुरू किया। छोटी पुड़िया में पान मसाला लोगों को बहुत पसंद आया।
करीब 25 वर्ष तक अर्श में रहने वाले विक्रम के अगस्त-2016 में अचानक फर्श पर पहुंचने की जानकारी सामने आई। उनके दीवालिया होने की खबर सबसे पहले अमर उजाला ने प्रकाशित की थी। जानकारों की मानें तो गलत निवेश और फिजूलखर्ची उनके व्यावसायिक पतन का कारण बनी।