अमेरिका और ईरान में तनाव से बढ़ते कच्चे तेल के दाम का सबसे ज्यादा असर भारत के चालू खाते के घाटे (कैड) पर होगा। सिंगापुर के वित्तीय बैंकिंग समूह डीबीएस ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में बताया कि वैश्विक स्तर पर गहराते भू-राजनैतिक संकट से 2020 में चालू घाटा बढ़ेगा का अनुमान है, जिससे भारत पर बकाया भुगतान की राशि भी बढ़ जाएगी। इसका असर खुदरा महंगाई की दरों पर भी होगा।
डीबीएस ने कहा कि तेल उत्पादक देशों और ओपेक समूह की ओर से आपूर्ति में प्रतिदिन 50 हजार बैरल की कटौती से आने वाले समय में कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। दूसरी ओर डॉलर के मुकाबले कमजोर होती भारतीय मुद्रा उसके आयात बिल में इजाफा करेगी। मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अभी डॉलर के मुकाबले 72 के करीब है। रिपोर्ट में कहा गया कि सरकार देश की जरूरत का 84 फीसदी कच्चा तेल आयात करती है और भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। अगर क्रूड में 10 डॉलर की बढ़ोतरी होती है तो जीडीपी के मुकाबले कैड 0.40 फीसदी बढ़ जाएगा। फिलहाल कैड घटकर 0.90 फीसदी है।
32 करोड़ रोजाना बढ़ गया खर्च
ईरान के सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की तीन जनवरी को हत्या के बाद से क्रूड के दाम करीब 5 डॉलर प्रति बैरल बढ़ गए हैं। भारत का मौजूदा आयात 45 लाख बैरल प्रतिदिन है। ऐसे में सिर्फ तेल खरीद के आयात बिल में रोजाना 32 करोड़ रुपये और महीने में 10,080 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
महंगाई और विकास दर पर असर
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, क्रूड के दाम अगर 10 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ जाते हैं, तो खुदरा महंगाई में 0.40 फीसदी उछाल आ सकता है। इसके अलावा पहले से ही छह साल की बड़ी गिरावट झेल रही विकास दर भी 20-30 आधार अंक नीचे जा सकती है।