2030 तक देश की जैव अर्थव्यवस्था 600 अरब डॉलर पर पहुंचेगी: मंडाविया
दूसरी ओर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोमवार को अहमदाबाद में कहा कि भारत की जैव अर्थव्यवस्था पिछले आठ साल में आठ गुना बढ़कर 80 अरब डॉलर हो गई है। देश ने 2030 तक इसके 600 अरब डॉलर तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। मंत्री वाइब्रेंट गुजरात से पहले 'जैव प्रौद्योगिकी : विकास भारत के लिए नवाचार और कल्याण का मार्ग' विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
आरबीआई ने ऋण माफी से जुड़े भ्रामक प्रचार को लेकर किया आगाह
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जनता को प्रिंट मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया मंच पर ऋण माफी की पेशकश से संबंधित भ्रामक विज्ञापनों को लेकर सोमवार को आगाह किया। आरबीआई की ओर से जारी बयान के अनुसार, उसने ऋण माफी की पेशकश करके उधारकर्ताओं को लुभाने वाले कुछ भ्रामक विज्ञापनों पर गौर किया है। ये संस्थाएं प्रिंट मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया मंच पर भी ऐसे कई अभियानों को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही हैं।
ऐसी संस्थाओं द्वारा बिना किसी अधिकार के ‘‘ऋण माफी प्रमाणपत्र’’ जारी करने के लिए सेवा/कानूनी शुल्क वसूलने की भी खबरें हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि कुछ स्थानों पर कुछ लोगों द्वारा कर्ज माफी की पेशकश से संबंधित अभियान चलाए जा रहे हैं, जो अपने अधिकारों को लागू करने में बैंकों के प्रयासों को कमजोर करते हैं।
आरबीआई ने कहा, ‘‘ ऐसी संस्थाएं गलतबयानी कर रही हैं कि बैंकों सहित वित्त संस्थानों का बकाया चुकाने की जरूरत नहीं है। ऐसी गतिविधियां वित्त संस्थानों की स्थिरता और सबसे अधिक जमाकर्ताओं के हित को कमजोर करती हैं।’’ आरबीआई ने आगाह किया कि ऐसी संस्थाओं के साथ जुड़ने से सीधे तौर पर वित्तीय नुकसान हो सकता है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि जनता को आगाह किया जाता है कि वे ऐसे झूठे व भ्रामक अभियानों का शिकार न बनें और ऐसी घटनाओं की शिकायत कानून प्रवर्तन एजेंसियों से करें।
पूर्ववर्ती सरकार ने 1.41 लाख करोड़ रुपये के तेल बॉंड जारी किए थे, चुकाई गई ढाई गुना राशि, बोले हरदीप सिंह पुरी
सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि कांग्रेस नीत पूर्ववर्ती सरकार के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर काबू के लिए 1.41 लाख करोड़ रुपये के तेल बॉंड जारी किए गए थे जिसके लिए मौजूदा सरकार ने 3.50 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि उस समय पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर काबू पाने के लिए ऐसा कदम उठाया गया जिसका भार अगली सरकार को उठाना पड़ा।