प्याज, टमाटर सहित खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी से अक्तूबर में खुदरा मूल्य आधारित महंगाई (सीपीआई) के मोर्चे पर तगड़ा झटका लगा है। इस महीने में सीपीआई बढ़कर 4.62 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई। जुलाई, 2018 के बाद ऐसा पहली बार है, जब रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4 फीसदी के मध्यावधि लक्ष्य से ऊपर सीपीआई पहुंची है। वहीं सितंबर, 2019 में यह 3.99 फीसदी और अक्तूबर, 2018 में यह 3.38 फीसदी के स्तर पर रही थी।
हाल में महाराष्ट्र जैसे प्याज उत्पादक राज्यों से आपूर्ति बाधित होने से इस सब्जी की कीमत कई शहरों में 80 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई थीं। हालांकि हाल में दिल्ली सहित कई शहरों में जमाखोरों पर हुई छापेमारी के बाद प्याज की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली है।
इससे पहले सरकार ने प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध, स्थानीय कारोबारियों पर स्टॉक लिमिट लगाने के बाद कीमतों को थामने के लिए इसके आयात का फैसला भी किया था। सरकार ने एक लाख टन प्याज के आयात का फैसला भी लिया है। इस क्रम में एमएमटीसी ने हाल में 4,000 टन प्याज के आयात के लिए निविदाएं भी आमंत्रित की थीं।