भारत में खुदरा महंगाई दर सितंबर महीने में बढ़कर 7.41 प्रतिशत पर पहुंच गई है। बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के लिए इसे दो फीसदी से छह फीसदी के बीच रखना जरूरी है पर लगातार तीसरी तिमाही में महंगाई की दर छह फीसदी से अधिक रही। नियमों के तहत अब आरबीआई के सरकार को यह बताना जरूरी हो गया है कि बढ़ती महंगाई को क्यों नियंत्रित नहीं किया जा सका है?
लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढांचे के तहत यदि सीपीआई (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) आधारित मुद्रास्फीति लगातार तीन तिमाहियों के लिए तय 2 से 6 प्रतिशत की सीमा से बाहर रहे तो आरबीआई को मूल्य वृद्धि के प्रबंधन में विफल माना जाता है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से महीने की शुरुआत में जारी आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 7.41 प्रतिशत हो गई, यह पिछले महीने सात प्रतिशत पर थी। बता दें कि नवंबर में बुलाई गई आउट ऑफ टर्न बैठक के बाद आरबीआई के एमपीसी की अगली बैठक दिसंबर महीने के पांच से सात तारीख के बीच पूर्व निर्धारित है।