कर्ज और ब्याज के भुगतान में नाकाम रही अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कैपिटल की कमान रिजर्व बैंक ने अपने हाथ ले ली है। अब कर्ज वसूली के लिए कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की जाएगी। रिजर्व बैंक ने सोमवार को बताया कि रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (आरसीएल) में अनिल अंबानी की अगुवाई वाले बोर्ड को भंग कर बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पूर्व कार्यकारी निदेशक नागेश्वर राव को प्रशासक नियुक्त किया है। कंपनी के बार-बार डिफॉल्ट करने व कॉरपोरेट संचालन में गंभीर आरोपों के बाद यह कदम उठाया है।
कर्ज की वसूली के लिए जल्द दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून के तहत कंपनी के खिलाफ समाधान प्रक्रिया शुरू की जाएगी। आरबीआई कंपनी के नए प्रशासक को समाधान पेशेवर के रूप में नियुक्त करने के लिए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण की मुंबई पीठ में आवेदन भी करेगा। कंपनी ने सितंबर की सालाना बैठक में अपने शेयरधारकों को बताया था िक उस पर कुल बकाया देनदारी करीब 40 हजार करोड़ रुपये है।
दिवालिया हुई तीसरी एनबीएफसी
रिजर्व बैंक ने एक साल में तीसरी एनबीएफसी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की है। इससे पहले दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड और श्रेई समूह के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू हुई। इसमें श्रेई समूह से कर्ज वसूली की प्रक्रिया अभी जारी है, जिसका समाधान होना है।
कंपनी के बोर्ड में ये थे शामिल
अनिल अंबानी की एनबीएफसी कंपनी रिलायंस कैपिटल के बोर्ड में चेयरमैन अनिल अंबानी, राहुल सरीन, छाया विरानी, थॉमस मैथ्यू और धनंजय तिवारी शामिल थे, जिसे अब रिजर्व बैंक की ओर से निलंबित कर दिया गया है।
5.48 करोड़ ब्याज नहीं देने पर कार्रवाई
रिलायंस कैपिटल ने एचडीएफसी और एक्सिस बैंक से लिए कर्ज पर 5.48 करोड़ ब्याज का भुगतान नहीं किया। कंपनी ने 27 नवंबर को स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि एचडीएफसी व एक्सिस बैंक से 624 करोड़ कर्ज लिया था। 31 अक्तूबर तक उसे एचडीएफसी को 4.77 करोड़ और एक्सिस बैंक को 71 लाख ब्याज चुकाने थे। एचडीएफसी ने 10.6-13% ब्याज पर कर्ज दिया था, जबकि एक्सिस बैंक 8.25% ले रहा है। कंपनी अप्रैल में एनसीडी पर भी ब्याज देने में असफल रही थी।
रिलायंस कैपिटल के कॉर्पोरेट गवर्नेंस का मामला काफी गंभीर है, जिसे अनदेखा नहीं कर सकते। जून 2019 में कंपनी के ऑडिटर्स ने चौथी तिमाही के परिणाम को लेकर सवाल खड़े किए थे। इसमें अकाउंटिंग के तरीके पर भी सवाल उठाया गया था।
-रिजर्व बैंक
रिलायंस कैपिटल की 90% संपत्ति बीमा कारोबार में
रिलायंस कैपिटल की शुरुआत 1998 में एनबीएफसी के तौर पर हुई थी, जिसके बाद कंपनी संपत्ति प्रबंधन, बीमा, कॉमर्शियल फाइनेंस और स्टॉक ब्रोकिंग का कारोबार भी करने लगी। इसके तहत रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस, रिलायंस जनरल इंश्योरेंस, रिलायंस सिक्योरिटीज जैसी कंपनियां आती हैं। रिलायंस कैपिटल की 90 फीसदी पूंजी जनरल इंश्योरेंस और रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस से आती है।
डेढ़ साल से लगातार घाटे में कंपनी
रिलायंस कैपिटल को चालू वित्तवर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में 6,001 करोड़ की आमदनी पर 1,156 करोड़ रुपये घाटा हुआ। 2020-21 में कंपनी ने 19,308 करोड़ राजस्व जुटाया। बावजूद इसके कुल 9,287 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।