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RBI: प्राथमिकता क्षेत्र के 50 हजार तक के ऋण पर अधिक शुल्क न वसूलें बैंक, आरबीआई ने जारी किए दिशा-निर्देश

Tue, 25 Mar 2025 11:38 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Reserve Bank of India: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) पर जारी नए मास्टर निर्देश में बैंकों से अधिक शुल्क नहीं वसूलने की बात कही है। ये निर्देश 1 अप्रैल, 2025 से लागू होंगे। इन दिशा-निर्देशों में केंद्रीय बैंक ने क्या-क्या कहा है, आइए जानते हैं।
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आरबीआई - फोटो : PTI
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विस्तार
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने साफ किया है कि बैंक विशेष रूप से प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) श्रेणी के तहत छोटी ऋण राशियों पर अत्यधिक शुल्क नहीं लगा सकते हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि 50,000 रुपये तक के प्राथमिकता क्षेत्र के ऋणों पर कोई सेवा शुल्क या निरीक्षण शुल्क नहीं लगाया जाएगा। बैंक के इस कदम का मकसद छोटे उधारकर्ताओं को अनावश्यक वित्तीय बोझ से बचाना और उचित ऋण प्रथाओं को सुनिश्चित करना है।

आरबीआई ने पीएसएल से जुड़े नए दिशा-निर्देश जारी किए

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) पर जारी नए मास्टर निर्देश में यह बात कही है। ये निर्देश 1 अप्रैल, 2025 से लागू होंगे। इन दिशा-निर्देशों में केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि बैंकों की ओर से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) से खरीदे गए सोने के आभूषणों के बदले लिए गए ऋणों को प्राथमिकता क्षेत्र ऋण श्रेणी के अंतर्गत नहीं माना जाएगा। इसका मतलब है कि बैंक ऐसे ऋणों को अपने पीएसएल लक्ष्यों के हिस्से के रूप में वर्गीकृत नहीं कर सकते।

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इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्राथमिकता क्षेत्र के फंड उन क्षेत्रों की ओर निर्देशित हों जिन्हें वास्तव में वित्तीय सहायता की आवश्यकता है, जैसे कि छोटे व्यवसाय, कृषि और समाज के के कमजोर वर्ग। इसने कहा "एनबीएफसी से बैंकों द्वारा खरीदे गए सोने के आभूषणों के बदले लिए गए ऋण प्राथमिकता क्षेत्र के दर्जे के लिए पात्र नहीं हैं"।

रिजर्व बैंक अधिक कठोर निगरानी प्रणाली शुरू करेगा

आरबीआई ने यह भी आश्वासन दिया है कि पहले के पीएसएल दिशा-निर्देशों (2020 ढांचे) के तहत वर्गीकृत सभी ऋण अपनी परिपक्वता तक प्राथमिकता क्षेत्र श्रेणी के पात्र बने रहेंगे। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि पीएसएल लक्ष्यों के साथ बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए, आरबीआई अधिक कठोर निगरानी प्रणाली शुरू करेगा। बैंकों को अब तिमाही और वार्षिक आधार पर अपने प्राथमिकता क्षेत्र के ऋणों से जुड़ा विस्तृत डेटा देना होगा।

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आरबीआई ने यह भी पुष्टि की है कि विशिष्ट कोविड-19 राहत उपायों के तहत दिए गए बकाया ऋणों को प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के रूप में वर्गीकृत किया जाना जारी रहेगा। इस निर्णय का उद्देश्य उन क्षेत्रों का समर्थन करना है जो अभी भी महामारी के आर्थिक प्रभाव से उबर रहे हैं।

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