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RBI MPC Meeting: रेपो रेट 6.5% ही रहेगी, आरबीआई गवर्नर बोले- एमपीसी ने इसे अपरिवर्तित रखने का फैसला किया

Thu, 06 Apr 2023 04:55 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

RBI MPC Meeting:  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज अपनी ताजा मौद्रिक नीति की घोषणा की है। आरबीआई गवर्नर ने बताया है कि रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा गया है।
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भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास - फोटो : YouTube: @ Reserve Bank of India
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विस्तार
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आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरू हो गई है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने इस बार रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है। लगातार छह बार रेपो रेट बढ़ाने के बाद आरबीआई ने नए वित्तीय की पहली एमपीसी बैठक में इसे स्थिर रखा है। माना जा रहा था कि आरबीआई रेपो दर में फिर 0.25 फीसदी की वृद्धि कर सकता है। हालांकि केंद्रीय बैंक ने ऐसा नहीं किया है। एमपीसी बैठक की जानकारी देने और इस दौरान लिए गए फैसलों के बारे में बोलते हुए गवर्नर शक्तिकांत दास ने ये बातें कही।

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FY 24 में जीडीपी ग्रोथ 6.5% प्रतिशत रहने का अनुमान: आरबीआई
फरवरी में हुई एमपीसी बैठक में रेपो दर को 0.25 फीसदी बढ़ाकर 6.50 फीसदी किया गया था। उस समय आरबीआई ने कहा था कि खुदरा महंगाई को काबू में रखने और उच्च विकास दर को बनाए रखने के लिए प्रमुख नीतिगत दर में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। आरबीआई गवर्नर ने गुरुवार की सुबह अपने बयान में कहा कि एमपीसी के सभी सदस्य रेपो रेट में बदलाव नहीं करने के पक्ष में थे। उन्होंने कहा कि भारत में बैंकिंग सेक्टर की स्थिति काफी मजबूत है। FY 23 में देश में अनाज उत्पादन में 6% की वृद्धि हुई है। आरबीआई के अनुसार FY 24 में महंगाई में कमी का अनुमान है। उन्होंने कहा कि  FY 24 में जीडीपी ग्रोथ 6.5% प्रतिशत रह सकती है। उन्होंने कहा कि  FY 23 की अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में चालू खाता घाटा जीडीपी का 2.7% रहा।

FY 24 में खुदरा महंगाई दर (CPI) 5.2 प्रतिशत रह सकती हैः आरबीआई गवर्नर 
गवर्नर शक्तिकांत ने महंगाई पर बोलते हुए कहा कि FY 24 में खुदरा महंगाई दर (CPI) 5.2 प्रतिशत रह सकती है। उन्होंने कहा कि मीडियम टर्म में महंगाई को तय सीमा के भीतर लाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि जब तक महंगाई तय सीमा के भीतर नहीं आती है तब तक लड़ाई जारी रहेगी। आरबीआई गवर्नर ने अनुमान जताया कि FY 24 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.8% रह सकती है। दास ने कहा कि हाल के वर्षों में देश में निगरानी व्यवस्था मजबूत हुई है। लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर आरबीआई की नजर बनी हुई है। रुपये की स्थिरता के लिए भी भारतीय रिजर्व बैंक की कोशिशें जारी हैं। आरबीआई गवर्नर ने कंपनियों को कैपिटल बफर बनाने की सलाह दी है।
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वित्त मंत्री ने आरबीआई के फैसले का स्वागत किया
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को बेंचमार्क दरों को अपरिवर्तित रखने के आरबीआई के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि आरबीआई ने अच्छा फैसला किया है। आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर बनाये रखने पर अपनी सहमति दी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि कोविड-19 महामारी और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद मुद्रास्फीति को छह प्रतिशत या उससे नीचे रखा गया है। उन्होंने कहा कि मूल्य वृद्धि एक ऐसा मामला है जिस पर केंद्र बहुत संवेदनशील और उत्तरदायी है। सीतारमण ने कहा कि महामारी और संघर्ष का भारत की ओर से आयात की जाने वाली वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ा है और सरकार ने सब्सिडी देने सहित कई कदम उठाए हैं। 

रेपो रेट में बदलाव नहीं करने के फैसले से रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगी मदद 
रिसर्च एंड रियल एस्टेट इंटेलिजेंस सर्विसेज, जेएलएल के मुख्य अर्थशास्त्री और प्रमुख डॉ. सामंतक दास के अनुसार RBI ने देश के मैक्रो-इकोनॉमिक लचीलापन, मजबूत बैंकिंग प्रणाली और मजबूत वित्तीय बाजारों का हवाला देते हुए रेपो दर को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने का साहसिक कदम उठाया है। इससे पहले लगातार छह बार ब्याज दरों में वृद्धि के प्रभाव का आकलन करने के लिए यह सही कदम है। यह रियल एस्टेट उद्योग जगत के लिए भी स्वागत योग्य कदम है। आरबीआई ने विभिन्न हितधारकों का ख्याल रखा है। भारत के हाउसिंग बाजार में 2023 की पहली तिमाही के दौरान बिक्री में 20% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है और यह 15 साल के उच्चतम स्तर पर भी पहुंच गया है। अप्रैल 2022 के बाद से होम लोन की ईएमआई में 15 से 17 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। जबकि इस दौरान होम लोन करीब चार से 12 प्रतिशत तक महंगा हुआ है। ऐसे में रेपो रेट को अपरिवर्तित रखने के आरबीआई के फैसले से ग्राहकों और रियल एस्टेट सेक्टर को बहुत हद तक राहत मिलेगी।

आरबीआई के पास नरम रुख अपनाने की पर्याप्त वजह
बता दें कि एसबीआई के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा था कि आरबीआई के पास अब इस बात के पर्याप्त कारण मौजूद हैं कि वह अप्रैल की समीक्षा में रेपो दर में कोई वृद्धि न करे। तरलता के मोर्चे पर दिक्कतों के बावजूद केंद्रीय बैंक आगामी एमपीसी बैठक में नरम रुख अख्तियार कर सकता है। 

5.5% के करीब बनी रह सकती है महंगाई
घोष ने कहा कि खुदरा महंगाई के मोर्चे पर फिलहाल बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले 10 साल में औसत महंगाई दर 5.8 फीसदी रही है। इस बात की बहुत कम संभावना है कि आने वाले दिनों में खुदरा महंगाई 5.5 फीसदी या उससे नीचे आएगी। पिछले दो महीने से खुदरा महंगाई आरबीआई के 6 फीसदी के संतोषजनक दायरे से ऊपर रही है। फरवरी में खुदरा महंगाई 6.44 फीसदी और जनवरी में 6.52 फीसदी रही थी। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने आशंका जताई थी कि पिछले दो महीनों से खुदरा महंगाई के 6 फीसदी से ऊपर बने रहने और तरलता के भी तटस्थ हो जाने के बाद अनुमान है कि आरबीआई रेपो दर में 0.25 फीसदी की वृद्धि कर सकता है। साथ ही, वह संकेत दे सकता है कि दरों में बढ़ोतरी का दौर खत्म हो चुका है। मई, 2022 से अब तक रेपो दर 2.50% बढ़ चुकी है।

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