पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर अब भारत के व्यापार पर भी साफ दिखने लगा है। इसी को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने निर्यातकों को बड़ी राहत दी है। आरबीआई ने एक्सपोर्ट क्रेडिट की समय सीमा बढ़ाने का फैसला लिया है, जिससे कारोबारियों को मौजूदा मुश्किल हालात में राहत मिल सके। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स प्रभावित हैं।
आरबीआई ने मंगलवार को कहा कि प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट फाइनेंस के लिए 450 दिनों की जो बढ़ी हुई अवधि थी, उसे अब 30 जून 2026 तक बढ़ा दिया गया है। पहले यह छूट 31 मार्च 2026 तक के लिए थी। आरबीआई ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण निर्यातकों को समय पर भुगतान और शिपमेंट में दिक्कत आ रही है, इसलिए यह कदम उठाया गया है।
क्या है एक्सपोर्ट क्रेडिट और यह राहत क्यों जरूरी है?
एक्सपोर्ट क्रेडिट वह कर्ज होता है, जो बैंकों द्वारा निर्यातकों को दिया जाता है ताकि वे सामान तैयार कर सकें और विदेश भेज सकें। मौजूदा हालात में शिपमेंट में देरी और भुगतान अटकने की समस्या बढ़ी है। ऐसे में समय सीमा बढ़ाने से निर्यातकों पर कर्ज चुकाने का दबाव कम होगा और उनका कारोबार जारी रह सकेगा।
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क्या भुगतान की समय सीमा में भी छूट दी गई है?
आरबीआई ने यह भी साफ किया है कि निर्यात से मिलने वाली राशि को देश में वापस लाने की समय सीमा, जो पहले 9 महीने थी और बाद में बढ़ाकर 15 महीने की गई थी, वह छूट जारी रहेगी। इससे निर्यातकों को भुगतान लाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा और वे बिना दबाव के व्यापार कर पाएंगे।
किसे मिलेगा इस फैसले का फायदा?
यह राहत सभी उन संस्थानों पर लागू होगी, जो निर्यात से जुड़े फाइनेंस का काम करते हैं। इसमें कमर्शियल बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक, एनबीएफसी और ऑल इंडिया फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस शामिल हैं। यानी छोटे से लेकर बड़े निर्यातकों तक, सभी को इस फैसले का फायदा मिलेगा।
क्या वैश्विक संकट इसका मुख्य कारण है?
आरबीआई ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण लॉजिस्टिक्स में बड़ी बाधाएं आ रही हैं। इसके साथ ही वैश्विक अनिश्चितता और सप्लाई चेन में रुकावटें भी बढ़ी हैं। इन कारणों से निर्यातकों के लिए तय समय सीमा में काम पूरा करना मुश्किल हो रहा है। आरबीआई ने संकेत दिया है कि वह हालात पर लगातार नजर रख रहा है। अगर जरूरत पड़ी तो आगे भी ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल यह
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