गूगल ने भारत में अपने 'गूगल स्टार्टअप एक्सीलेटर इंडिया' प्रोग्राम के नए 2026 बैच के लिए आवेदन मंगाने शुरू कर दिए हैं। तीन महीने के इस इक्विटी फ्री प्रोग्राम पूरा फोकस एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित स्टार्टअप्स पर है। गूगल ने अपने एक ब्लॉग पोस्ट में बताया कि यह प्रोग्राम शुरुआती स्टेज (सीड से सीरीज ए) वाली उन कंपनियों के लिए है, जो खास तौर पर भारत की चुनौतियों या ग्लोबल लेवल की जरूरतों को पूरा करने के लिए नए समाधान तैयार कर रही हैं।
एआई में बड़े बदलाव की तैयारी
गूगल अब केवल जनरेटिव एआई के साथ प्रयोग करने से आगे बढ़ चुका है। कंपनी का फोकस अब ऐसे खास सिस्टम, एजेंट-आधारित वर्कफ्लो और स्थानीय एआई मॉडल बनाने पर है, जो बड़ी आबादी के काम आ सकें और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा सकें।
गूगल को किस तरह के स्टार्टअप्स की तलाश है?
वर्ष 2026 के बैच के लिए गूगल ने अपना ध्यान मुख्य रूप से चार अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी क्षेत्रों पर केंद्रित किया है। कंपनी विशेष रूप से एजेंटिक एआई पर काम करने वाले स्टार्टअप्स को तलाश रही है, जो ऐसे ऑटोमेशन सिस्टम बना सकें जो खुद तर्क करने और जटिल काम पूरा करने की क्षमता रखते हों। इसके साथ ही, मल्टीमॉडल एआई विकसित करने वाली कंपनियों पर भी जोर दिया जा रहा है, जिनके मॉडल टेक्स्ट, ऑडियो, वीडियो और इमेज पर एक साथ काम कर सकें। गूगल की दिलचस्पी फिजिकल एआई के क्षेत्र में भी है, जो रोबोटिक्स और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसे वास्तविक दुनिया के उदाहरणों को कवर करता है। वहीं, स्थानीय जरूरतों को समझते हुए सॉवरेन एआई पर भी फोकस रहेगा, जो किसी खास क्षेत्र या भाषा के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए लोकल मॉडल होते हैं। कुल मिलाकर, गूगल का उन स्टार्टअप्स को हाथ थामना चाहता है जो सिर्फ छोटे-मोटे टूल्स नहीं बना रहे, बल्कि बड़े पैमाने पर असल दुनिया की गंभीर समस्याओं का समाधान निकाल रहे हैं।
चुने गए स्टार्टअप्स को क्या मिलेगा?
इस प्रोग्राम की सबसे बड़ी और आकर्षक खासियत यह है कि यह पूरी तरह से इक्विटी-फ्री है। इसका मतलब है कि गूगल इन फायदों के बदले आपकी कंपनी में कोई हिस्सेदारी नहीं लेगा। चुने गए स्टार्टअप्स को गूगल के सबसे शक्तिशाली एआई मॉडल्स जैसे Gemini, Gemma, Imagen, Veo और Lyria का सीधा एक्सेस दिया जाएगा, ताकि वे अपनी तकनीक को और एडवांस बना सकें। इसके अलावा, स्टार्टअप्स को गूगल डीपमाइंड, क्लाउड और एंड्रॉयड जैसी दिग्गज टीमों के एक्सपर्ट्स से वन-ऑन-वन मेंटरशिप पाने का मौका भी मिलेगा। तकनीकी मजबूती के लिए गूगल उन्हें TPUs और फ्री क्लाउड क्रेडिट्स जैसा प्रीमियम इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट मुहैया करेगा। साथ ही, कंपनियों को उनके प्रोडक्ट और ग्रोथ के लक्ष्यों पर केंद्रित रखने के लिए हर हफ्ते खास ट्रैकिंग और सपोर्ट की सुविधा भी दी जाएगी, ताकि वे अपने विजन को सफलतापूर्वक धरातल पर उतार सकें।
पुराने स्टार्टअप्स का रहा है शानदार रिकॉर्ड
इस एक्सीलरेटर प्रोग्राम का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड काफी प्रभावशाली रहा है, जहां इससे जुड़े स्टार्टअप्स ने गूगल के टूल्स का इस्तेमाल कर असाधारण परिणाम हासिल किए हैं। इन कंपनियों ने न केवल अपनी कमाई में इजाफा किया, बल्कि अपनी एआई परफॉरमेंस और तकनीक को भी काफी बेहतर बनाया है। इसके कुछ बेहतरीन उदाहरण स्वास्थ्य और संचार जैसे क्षेत्रों में देखने को मिलते हैं। जैसे कि एक हेल्थ स्टार्टअप ने ऑफलाइन एआई डिवाइस के जरिए हजारों मरीजों की सफल जांच की, वहीं एक वॉयस एआई प्लेटफॉर्म ने भारतीय भाषाओं में होने वाली मैनुअल कॉलिंग की जरूरत को काफी हद तक कम कर दिया। इसके अलावा, कई एंटरप्राइज टूल्स ने भी गूगल के एआई मॉडल्स की मदद से अपनी कार्यक्षमता बढ़ाई और लागत में बड़ी कटौती की है। ये सभी उदाहरण इस बात का प्रमाण हैं कि एआई अब केवल प्रयोग या डेमो तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह रोजमर्रा की जिंदगी और बिजनेस की वास्तविक समस्याओं का प्रभावी समाधान बन चुका है।
कैसे करें आवेदन?
'गूगल स्टार्टअप एक्सीलेटर: इंडिया' के 2026 बैच का सफर इस वर्ष जून में बंगलूरू में एक हफ्ते के धमाकेदार बूटकैंप के साथ शुरू होने जा रहा है। इस शुरुआती ट्रेनिंग के बाद यह प्रोग्राम कई महीनों तक ऑनलाइन मोड में चलेगा। इससे स्टार्टअप्स को अपनी बारीकियों पर काम करने का पूरा समय मिलेगा। इस पूरे सफर का समापन अक्तूबर में होने वाले भव्य 'डेमो डे' के साथ होगा, जहां स्टार्टअप्स को अपनी प्रोग्रेस दिखाने का मौका मिलेगा। इस खास प्रोग्राम के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और जो भी स्टार्टअप्स इसमें शामिल होकर गूगल की मदद से अपनी ग्रोथ को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं, वे 19 अप्रैल 2026 तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।