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Railways: रेलवे में एसी थ्री टियर की बंपर डिमांड! पांच साल में राजस्व में जबरदस्त उछाल, आंकड़े कर देंगे हैरान

Mon, 24 Feb 2025 12:02 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Railways: भारतीय रेलवे में यात्रा का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। एक समय स्लीपर क्लास राजस्व में सबसे बड़ा योगदान देता था, लेकिन अब एसी 3 टियर ने इसकी जगह ले ली है। पिछले पांच वर्षों में इस श्रेणी से रेलवे को होने वाली कमाई में जबरदस्त उछाल देखा गया है। इससे जुड़े आंकड़े क्या कहते हैं, आइए विस्तार से समझते हैं।
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भारतीय रेलवे - फोटो : amarujala.com
भारतीय रेलवे में यात्रा का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। एक समय स्लीपर क्लास राजस्व में सबसे बड़ा योगदान देता था, लेकिन अब एसी थ्री टियर ने इसकी जगह ले ली है। पिछले पांच वर्षों में इस श्रेणी से रेलवे को होने वाली कमाई में जबरदस्त उछाल देखा गया है। 2024-25 में, रेलवे के कुल अनुमानित 80,000 करोड़ रुपये के यात्री राजस्व में अकेले एसी थ्री टियर का योगदान 30,089 करोड़ रुपये (38%) रहने का अनुमान है। दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ 26 करोड़ यात्री (कुल 727 करोड़ में से 3.5%) एसी थ्री टियर से यात्रा कर रहे हैं, फिर भी यह सबसे अधिक कमाई करने वाली श्रेणी बन गई है।
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ट्रेन टिकट - फोटो : Adobe Stock

एसी थ्री टियर पर लोगों का बढ़ रहा भरोसा, बढ़ा राजस्व

बजट 2025-26 के अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में, भारतीय रेलवे का कुल यात्री राजस्व 80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। जिसमें से अकेले एसी थ्री टियर से 30,089 करोड़ रुपये (38%) आ सकते हैं। दूसरी ओर, स्लीपर क्लास से महज 19.5% का राजस्व मिलने का अनुमान है। दिलचस्प बात यह है कि केवल 26 करोड़ यात्री (727 करोड़ यात्रियों में से 3.5%) इस श्रेणी में यात्रा कर रहे हैं, फिर भी यह सबसे अधिक राजस्व दे रहा है यह प्रवृत्ति भारत में यात्रा के प्रति बढ़ती प्राथमिकता और आर्थिक सुधार को दर्शाती है। अधिक यात्री अब आरामदायक और बेहतर सुविधाओं वाली यात्रा को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसके कारण एसी थ्री टियर से आने वाले राजस्व में लगातार वृद्धि हो रही है।
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सबसे सस्ती एसी ट्रेन - फोटो : freepik

एसी 3 टियर के यात्रियों की संख्या पांच वर्षों में दोगुने से अधिक हुई

पिछले पांच वर्षों में, एसी थ्री टियर यात्रियों की संख्या 2019-20 में 11 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 26 करोड़ तक पहुंच गई है, यानी में 19% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) देखी गई। इसी दौरान, इस श्रेणी का किराया भी (डायनमिक प्राइसिंग के कारण) बढ़ा है, लेकिन यह एसी के अन्य श्रेणियों की तुलना में काफी कम है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, एसी थ्री टियर का औसत किराया 2019-20 में 1,090 रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 1,171 रुपये हो गया, यानी इसमें 7.4% वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी ओर, एसी फर्स्ट क्लास के किराये में 25.38%,  एसी चेयर कार में 23.24% और  एसी 2 टियर में 18.22% की बढ़ोतरी हुई। एसी 2 टियर का किराया 2019-20 में 1,267 रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 1,498 रुपये हो गया। स्लीपर क्लास के किराये में 10.64% की वृद्धि दर्ज की गई।

स्लीपर क्लास से आने वाले राजस्व में आई कमी

महामारी-पूर्व वर्ष 2019-20 में, रेलवे का सबसे अधिक यात्री राजस्व स्लीपर क्लास से आता था। उस समय, स्लीपर क्लास से 13,641 करोड़ रुपये (कुल यात्री राजस्व का 27%) प्राप्त हुए थे। लेकिन 2024-25 में, यह घटकर 15,603 करोड़ रुपये (19.5%) रह गया है। इस दौरान स्लीपर क्लास से सफर करने वाले यात्रियों की संख्या 37 करोड़ से बढ़कर 38 करोड़ हो गई है।
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सबसे सस्ती एसी ट्रेन - फोटो : freepik

एसी और स्लीपर के मामले में बदल रही यात्रियों की पसंद

आंकड़े बताते हैं कि यात्रा के दौरान सीट के चयन के मामले में रेल यात्रियों की पसंद भी बदल रही है।  2019-20 में एसी के कुल  यात्रियों की संख्या  18 करोड़ थी, जो 2024-25 में बढ़कर 38 करोड़ हो गई, यानी इसमें दोगुने से अधिक का इजाफा हुआ। दूसरी ओर,  बिना एसी के सफर करने वाले यात्रियों की संख्या 2019-20 में 790 करोड़ थी, जो 2024-25 में घटकर 688 करोड़ रह गई। 

सुविधाएं बेहतर हों तो अधिक भुगतान को भी तैयार यात्री

एसी3 टियर में यात्रियों की बढ़ती संख्या दिखाती है कि भारतीय रेलवे अब अधिक आरामदायक यात्रा का विकल्प दे रहा और लोग इसके लिए अधिक भुगतान करने को भी तैयार हैं। बढ़ती मूल्य निर्धारण शक्ति, बेहतर सुविधाएं, और यात्रा अनुभव में सुधार की वजह से एसी- 3टियर भारतीय रेलवे के लिए सबसे अधिक लाभदायक श्रेणी बन गया है। इस ट्रेंड से स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में रेलवे का राजस्व मॉडल एसी श्रेणी, विशेष रूप से एसी 3टियर, पर अधिक निर्भर रहेगा, जिससे भारतीय रेल को अधिक लाभ होगा और यात्रियों को भी बेहतर यात्रा अनुभव मिलेगा, बशर्ते सरकार अपने संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में सफल रहे।
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