Former RBI governor Raghuram Rajan
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने मौजूदा 'असाधारण परिस्थितियों' में आर्थिक सेहत को बचाने के लिए सरकार को एक सीमा तक मुद्रीकरण (मोनेटाइजेशन) का सुझाव दिया है।
राजन ने ऐसे समय में यह सुझाव दिया है, जब सरकार कोरोना वायरस के अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव से निपटने के लिए धन जुटाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2020-21 के लिए बाजार उधार सीमा में भारी-भरकम 4.2 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 12 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। कोविड-19 संकट की वजह से अर्थव्यस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। ऐसे में राजस्व में कमी की भरपाई के लिए सरकार ने बाजार से कर्ज जुटाने की अनुमानित सीमा को बढ़ा दिया है।
इस संदर्भ में राजन ने 'मोनेटाइजेशनः नाइदर गेम चेंजर नॉर केटेस्ट्रोफ इन एबनॉर्मल टाइम्स' शीर्षक नाम से एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा कि 'सरकार को अर्थव्यवस्था की सेहत की चिंता करनी चाहिए और जरूरी चीजों पर पैसे खर्च करने चाहिए। हालांकि, इन प्रयासों के तहत प्राथमकिता के आधार पर खर्च किया जाना चाहिए और अनावश्यक खर्चों में कमी लाई जानी चाहिए।'
राजकोषीय घाटे को ध्यान में रखे सरकार
राजन के अनुसार, सरकार को राजकोषीय घाटे को भी ध्यान में रखना चाहिए। इस दिशा में मुद्रीकरण किसी तरह की बाधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मोनेटाइजेशन कभी भी बहुत बड़ा बदलाव लाने में सक्षम साबित नहीं हुआ है। एक सीमा तक इस विकल्प को अपनाने से कोई बहुत बड़ी दिक्कत भी नहीं पैदा होनी चाहिए।
राजन ने कहा कि कुछ हलकों में इस बात को लेकर काफी चिंता है कि केंद्रीय बैंक भारी बजट घाटा की पूर्ति के लिए नोटों की छपाई कर रहा है। वहीं, कुछ लोगों को लग रहा है कि केंद्रीय बैंक पर्याप्त कदम नहीं उठा रहा है। कठिन परिस्थितियों में कथित मोनेटाइजेशन ना ही गेम चेंजर है और ना ही बहुत बड़ी तबाही लाने वाला है। इससे थोड़ी मदद मिल सकती है लेकिन इससे सरकार की वित्तीय दिक्कतों को नहीं सुलझाया जा सकता है और ना ही इससे महंगाई दर बहुत ऊपर चढ़ जाएगी।