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Economy: राजन बोले- नीतिगत ब्याज दर तय करते समय खाद्य मुद्रास्फीति पर भी विचार जरूरी; SEBI चीफ बुच पर भी बोले

Wed, 02 Oct 2024 11:20 PM IST
पवन पांडेय बिजनेस डेस्क, अमर उजाला

सार

पूर्व आरबीआई गवर्नर ने बाजार नियामक सेबी की प्रमुख माधबी पुरी बुच के खिलाफ हाल में लगे कई आरोपों पर कहा कि इसे लेकर सजग रहना होगा क्योंकि कोई भी किसी भी समय आरोप लगा सकता है। उन्होंने कहा, लेकिन अगर आरोपों की पर्याप्त जांच हुई है तो नियामक के लिए सभी आरोपों से परे होना बेहद अहम है। इसका मतलब है कि उसे आरोपों को बिंदुवार संबोधित करना होगा।
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रघुराम राजन, पूर्व गवर्नर, RBI - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि वह खाद्य मूल्य वृद्धि को मुख्य मुद्रास्फीति से बाहर रखने से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि ऐसा करने से लोगों का केंद्रीय बैंक के प्रति भरोसा कमजोर होगा, क्योंकि इसे महंगाई को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी दी गई है। राजन ने कहा कि मुद्रास्फीति (महंगाई) को उन वस्तुओं और सेवाओं पर केंद्रित चाहिए, जो लोग रोजमर्रा के जीवन में उपयोग करते हैं। उपभोक्ताओं की धारणा महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करती है।
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उन्होंने कहा, जब मैं गवर्नर बना था, उस समय भी हम पीपीआई (उत्पादक मूल्य सूचकांक) को फोकस कर रहे थे। लेकिन इसका एक औसत उपभोक्ता के समक्ष पेश होने वाली चुनौतियों से कोई लेना-देना नहीं होता है। पूर्व आरबीआई गर्वनर ने कहा, ऐसे में जब आरबीआई कहता है कि महंगाई कम है तो पीपीआई पर नजर डालें। अगर उपभोक्ता कुछ अलग तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं तो वे वास्तव में यह नहीं मानते कि महंगाई कम हुई है।

आर्थिक समीक्षा 2023-24 में मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने नीतिगत दर निर्धारण की प्रक्रिया से खाद्य महंगाई को बाहर रखने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि मौद्रिक नीति का खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ता है क्योंकि कीमतें आपूर्ति पक्ष के दबावों से तय होती हैं। वर्तमान में अमेरिका स्थित शिकॉगो बूथ में वित्त के प्रोफेसर राजन ने इस दलील पर कहा, आप अल्पावधि में खाद्य कीमतों को प्रभावित नहीं कर सकते लेकिन यदि खाद्य कीमतें लंबे समय तक अधिक रहती हैं तो इसका मतलब है कि मांग के सापेक्ष खाद्य उत्पादन पर कुछ बंदिशें हैं। इसका अर्थ है कि इसे संतुलित करने के लिए आपको अन्य क्षेत्रों में महंगाई को कम करना होगा।
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पूर्व आरबीआई गवर्नर ने बाजार नियामक सेबी की प्रमुख माधबी पुरी बुच के खिलाफ हाल में लगे कई आरोपों पर कहा कि इसे लेकर सजग रहना होगा क्योंकि कोई भी किसी भी समय आरोप लगा सकता है। उन्होंने कहा, लेकिन अगर आरोपों की पर्याप्त जांच हुई है तो नियामक के लिए सभी आरोपों से परे होना बेहद अहम है। इसका मतलब है कि उसे आरोपों को बिंदुवार संबोधित करना होगा।

सेबी प्रमुख के खिलाफ लगे आरोपों को हितों के टकराव का मामला बताते हुए राजन ने कहा कि आरोपों की जितनी विस्तृत जांच हुई है, उतना ही विस्तृत बिंदुवार जवाब होना चाहिए। उन्होंने कहा, आखिरकार, मुझे लगता है कि हमारे विनियामक का यथासंभव विश्वसनीय होना महत्वपूर्ण है। पिछले महीने माधबी और उनके पति धवल बुच ने हिंडनबर्ग रिसर्च और कांग्रेस की तरफ से लगाए गए अनुचित व्यवहार और हितों के टकराव के आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि ये झूठे, दुर्भावनापूर्ण और प्रेरित हैं।
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