क्विक कॉमर्स आने वाले वर्षों में काफी प्रतिस्पर्धी बना रहेगा। वहीं फूड डिलीवरी सेगमेंट ऑनलाइन प्लेटफार्मों के लिए मुख्य लाभ का स्रोत बना रहेगा। बर्नस्टीन रिसर्च की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टोर का स्थान, उपभोक्ता डेटा और परिचालन संबंधी कठोरता, क्विक कॉमर्स व्यवसाय के लिए प्रमुख मूल्य-संचालक बने हुए हैं। ये कारक मौजूदा कंपनियों को महत्वपूर्ण रूप से आगे बढ़ने का लाभ देता है। हालांकि, इस क्षेत्र की ग्रोथ अब 20% से नीचे आ गई है, क्योंकि चैनल-शिफ्ट फेज यानी ऑफलाइन से ऑनलाइन डिलीवरी की ओर मांग बढ़ने वाला दौर अब लगभग खत्म हो चुका है।
दूसरी ओर, क्विक कॉमर्स में ब्लिंकिट, इंस्टामार्ट और जेप्टो शीर्ष तीन कंपनियों के रूप में अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये तीनों कंपनियां प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बावजूद लाभदायक बनी रह सकती हैं। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि क्विक कॉमर्स में बाजार हिस्सेदारी तो नेताओं के पास है, लेकिन मुनाफे का वितरण फूड डिलीवरी की तुलना में उतना केंद्रित नहीं है। यानी, क्विक कॉमर्स में हर खिलाड़ी के लिए मौका है, लेकिन असली ‘कैश फ्लो’ अब भी फूड डिलीवरी से ही आता है।
बर्नस्टीन ने आगे बताया कि भारतीय उपभोक्ताओं का शीर्ष-5 प्रतिशत लगभग 7 करोड़ लोग, जिनकी प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद लगभग 20,000 अरब डॉलर है। वित्त वर्ष 2030 तक 80 अरब डॉलर का प्रतिनिधित्व करेंगे।