अमेरिकी सरकार ने चिपमेकर कंपनी इंटेल में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है। कंपनी के सीईओ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को इस डील का एलान किया। दरअसल पिछली बाइडन सरकार में इंटेल को बड़ी आर्थिक मदद देने का एलान किया गया था। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस डील की आलोचना की और आर्थिक सहायता के बदले इंटेल में हिस्सेदारी देने की मांग की। अब दोनों पक्षों में सहमति बन गई है।
सौदे के तहत कंपनी को इस तरह मिलेगा फंड
इंटेल ने एक बयान में कहा कि इस समझौते के तहत, अमेरिकी सरकार को सामान्य स्टॉक के 43.3 करोड़ शेयर मिलेंगे, जो कंपनी में 9.9 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर हैं। यह करीब 8.9 अरब डॉलर का निवेश है, जिसका एक हिस्सा 5.7 अरब डॉलर अनुदान के रूप में दिया जाएगा, जो चिप और विज्ञान कानून के तहत दिया जाएगा। यह बाइडन सरकार के कार्यकाल के दौरान पारित एक प्रमुख कानून है जिसकी ट्रंप ने आलोचना की है। इंटेल ने कहा कि बाकी के 3.2 अरब डॉलर सिक्योर एन्क्लेव कार्यक्रम के तहत कंपनी को मिलेंगे।
कंपनी ने आगे कहा कि 8.9 अरब डॉलर का यह निवेश इंटेल को पहले ही मिल चुके 2.2 अरब डॉलर के अनुदान से अलग होगा। इस तरह इस सौदे की कुल राशि 11.1 अरब डॉलर हो जाएगी। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर साझा पोस्ट में लिखा, 'संयुक्त राज्य अमेरिका अब इंटेल के 10% का पूर्ण स्वामित्व और नियंत्रण रखता है।' उन्होंने दावा किया कि इंटेल के सीईओ लिप-बू टैन के साथ बातचीत के बाद देश ने इन शेयरों के लिए कोई भुगतान नहीं किया।
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बोर्ड में या कंपनी के संचालन में सरकार का दखल नहीं होगा
इंटेल ने अपने बयान में कहा 'इंटेल में सरकार का निवेश निष्क्रिय स्वामित्व होगा और कंपनी को बोर्ड में और कंपनी के संचालन या प्रशासन में सरकार का कोई दखल नहीं होगा। अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने शुक्रवार को एक्स पर कहा, 'यह ऐतिहासिक समझौता सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अमेरिकी नेतृत्व को मज़बूत करता है।' इंटेल को एक समय सिलिकॉन वैली की सबसे प्रतिष्ठित कंपनियों में से एक माना जाता था, लेकिन एशियाई कंपनियों TSMC और सैमसंग के आने के बाद सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में इंटेल का दबदबा कम हुआ। चिप्स और विज्ञान कानून का मकसद अमेरिका में सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत करना था। इसके लिए बाइडन सरकार ने अरबों डॉलर के अनुदान का एलान किया था।