वित्त वर्ष 2020-21 के लिए आम बजट अगले साल एक फरवरी को पेश होगा। वहीं आर्थिक सर्वे 31 जनवरी को आएगा। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा कि बजट को पेश करने के लिए सभी तैयारियां की जा रही हैं। इसके लिए 16 दिसंबर से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण विभिन्न पक्षों के साथ प्री-बजट बैठकों का सिलसिला शुरू करने जा रही हैं। इस दौरान वित्त मंत्री उद्योग संगठनों, कृषि संगठनों और अर्थशास्त्रियों के साथ बैठकों में उपभोग और वृद्धि को प्रोत्साहन के लिए सुझाव मांगेंगी। सूत्रों के अनुसार, विचार विमर्श सोमवार से शुरू होकर 23 दिसंबर तक चलेगा।
2015-16 के बाद यह पहला मौका है जब बजट को शनिवार के दिन सदन में पेश किया जाएगा। अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती को दूर करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार के बजट में कई और रियायतों की घोषणा कर सकती हैं। यह सीतारमण का दूसरा बजट होगा।
भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली दूसरी सरकार की दूसरे बजट की तैयारियां जोरों पर है, लेकिन वित्त मंत्रालय की बजट तैयार करने वाली टीम में दो प्रमुख अधिकारियों की कमी बनी हुई है। इसमें एक पूर्णकालिक व्यय सचिव शामिल हैं।
वित्त मंत्रालय ने 14 अक्तूबर से 2020-21 के बजट की तैयारियों की कवायद शुरू की थीं। पिछले महीने कई विभागों और मंत्रालयों के साथ बैठक हुई हैं। व्यय सचिव द्वारा अन्य सचिवों और वित्तीय सलाहकारों के साथ चर्चा के बाद ही बजट को अंतिम रूप दिया जाएगा।
छह साल के निचले 4.5 फीसदी के स्तर पर पहुंची आर्थिक विकास दर को रफ्तार देने के लिए ढांचागत सुधारों की दूसरी लहर की उम्मीद में एक फरवरी को पेश होने वाले बजट, 2020-21 का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। सरकार की बजट टीम में व्यय सचिव के अलावा संयुक्त सचिव (बजट) का पद लगभग तीन महीने से खाली पड़ा है। बजट तैयार करने के लिहाज से इन दोनों अधिकारियों को खासा अहम माना जाता है।
आर्थिक सुस्ती को देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के दूसरे बजट को खासा अहम माना जा रहा है। पिछले हफ्ते ही आरबीआई ने अपनी मौद्रिक नीति में 2019-20 के लिए अपने विकास अनुमान को 6.1 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया था।