पॉलीथिन बैग के लिए कच्चा माल 150 रुपये किलो के हिसाब से मिलता है जबकी रिसाइकिल बैग्स के लिए कीमत 35 रुपये प्रति किलो है। लेकिन 1 किलो प्लास्टिक से कागज के मुकाबले कई गुना ज्यादा बैग बनते हैं। अभी सबसे कम कीमत का कागज बैग भी 6 रुपये में मिलता है। लेकिन अगर मांग इसी तरह बढ़ती रही तो जल्द ही 3 से 4 रुपये में कागज से बने हुए बैग मिलने लगेंगे।
बढ़ गए रद्दी के दाम
अभी बैन को लगे एक ही दिन हुआ है, लेकिन प्रदेश में कई जगह अखबार की रद्दी के भाव भी बढ़ गए हैं। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में जहां शनिवार तक रद्दी का भाव 10 रुपये किलो थो, वो सोमवार को 16-20 रुपये के बीच पहुंच गया है। वहीं जिले स्तर पर भी अधिकारियों ने राज्य सरकार के इस निर्णय को अमली-जामा पहनाना शुरू कर दिया है।
रविवार को कई जगह हो रहा था पॉलीथिन का प्रयोग
हालांकि अध्यादेश के लागू होने के पहले दिन कई जगह पॉलीथिन का प्रयोग होते हुए देखा गया। वहीं कुछ दुकानदार छापा पड़ने के डर से ग्राहकों को पन्नी में सामान देने से बच रहे थे और उनसे खुद ही थैला लाने के लिए कह रहे थे।
कागज की पैकिंग का बढ़ा बाजार
कागज से बने बैग, कप और स्ट्रा जैसे आइटम का बाजार भी तेजी से बढ़ा है। लेकिन सबसे ज्यादा फायदा कागज से होने वाली पैकेजिंग को हुआ है। पिछले 1-2 सालों में कागज पैकेजिंग करीब 20 फीसदी बढ़ी है और अभी कागज का 70 फीसदी पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल होता है। अगर राज्य प्लास्टिक बैन का सही से पालन करें तो पेपर बैग इंडस्ट्री में जबरदस्त ग्रोथ देखने को मिल सकती है।