भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा खाका पेश किया है। जर्मन राजधानी बर्लिन में आयोजित एक व्यापारिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 310 अरब यूरो करने का एक साहसिक लक्ष्य रखने का आह्वान किया है। यह प्रस्ताव भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच अंतिम रूप से तैयार हो चुके मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लागू होने से ठीक पहले सामने आया है।
भारत के प्राचीन गणितीय योगदान को याद करते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के महान गणितज्ञ आर्यभट्ट ने 'शून्य' की खोज की थी। वर्तमान में भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार 31 अरब यूरो का है, और यदि इसमें एक शून्य जोड़ दिया जाए, तो यह 310 अरब यूरो का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य बन जाता है। पीयूष गोयल बर्लिन में भारतीय उद्योग जगत के 100-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि 310 अरब यूरो का लक्ष्य बहुत बड़ा लगता है, लेकिन यदि दोनों देश अपनी ताकत को मिलाकर ठोस योजनाएं बनाएं और मुख्य क्षेत्रों की पहचान करें, तो इसे हासिल किया जा सकता है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर पिछले 20 वर्षों से बातचीत चल रही थी, लेकिन इसे पिछले 13 महीनों की गहन वार्ताओं के बाद अंतिम रूप दिया गया।
द्विपक्षीय बैठक के दौरान भारतीय वाणिज्य मंत्री और जर्मनी की संघीय आर्थिक मामलों एवं ऊर्जा मंत्री कैथरीना राइश ने भविष्य की प्रमुख प्रौद्योगिकियों पर विस्तृत चर्चा की।
दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र:
जर्मनी की आर्थिक मामलों की मंत्री कैथरीना राइश ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने और लालफीताशाही को कम करने का सुझाव दिया तथा भारतीय उद्योगों का स्वागत किया।
पीयूष गोयल ने दोनों देशों के व्यापारिक घरानों को सलाह दी है कि वे समझौते के लागू होने से पहले ही गुणवत्ता के मानकों, मूल्य निर्धारण और सैंपलिंग का आदान-प्रदान शुरू कर दें। इससे एफटीए के लागू होते ही शुरुआती दौर में ही दोनों देशों के कारोबारी इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते का अधिकतम लाभ उठा सकेंगे।